आर्य समाज प्रश्नोत्तरी (FAQ)

आर्य समाज प्रश्नोत्तरी, आर्य समाज को लेकर मन में उठने वाले प्रत्येक प्रश्नों का समाधान।

Arya Samaj
Om Symble

Short Introduction:- आर्य समाज एक हिन्दू सुधार आन्दोलन है जिसकी स्थापना स्वामी दयानन्द सरस्वती ने 1875 में बंबई में मथुरा के स्वामी विरजानन्द की प्रेरणा से की थी। आर्य समाज में शुद्ध वैदिक परम्परा में विश्वास करते हैं तथा मूर्ति पूजा, अवतारवाद, बलि को अस्वीकार करते हैं। इसमें छुआछूत व जातिगत भेदभाव का विरोध किया तथा स्त्रियों व शूद्रों को भी यज्ञोपवीत धारण करने व वेद पढ़ने का अधिकार दिया था।

स्वामी दयानन्द सरस्वती द्वारा रचित सत्यार्थ प्रकाश नामक ग्रन्थ आर्य समाज का मूल ग्रन्थ है। आर्य समाज का आदर्श वाक्य है: कृण्वन्तो विश्वमार्यम्, जिसका अर्थ है – विश्व को आर्य बनाते चलो।


आर्य समाज प्रश्नोत्तरी (Arya Samaj FAQ In Hindi)

प्रश्न – आर्य समाज’ किसे कहते हैं ?
उत्तर- जो आर्य लोगों का समाज है, उसको ‘आर्य समाज’ कहते हैं ।

प्रश्न – ‘आर्य’ किसे कहते हैं ?
उत्तर- जो चारों वेद और उनके बताये हुए धर्म को माने, उसे ‘आर्य” कहते हैं ।

प्रश्न – ‘समाज’ किसे कहते हैं ?
उत्तर-किसी काम के करने के लिए इकट्ठे हुए मनुष्यों के समूह को ‘समाज’ कहते हैं।

प्रश्न- आर्य समाज में किस जाति के लोग आते है?
उत्तर- आर्य समाज का किसी जाति से नही अपितु एक विशेष विचारधारा को मानने वाले का समूह है।

प्रश्न – चारों वेद कौन-कौन से हैं ?
उत्तर- ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद ।

प्रश्न- वेद किसके और कब बनाये हैं?
उतर-परम पिता परमात्मा ने, सृष्टि के आरंभ में।

प्रश्न- परमपिता परमेश्वर कहां रहते हैं ?
उत्तर- सब जगह रहते हैं। कोई जगह उनसे खाली नहीं है।

प्रश्न- परमात्मा कब से है?
उत्तर-परमात्मा सदा से है। परमात्मा न कभी पैदा होता है और न कभी मरता है। उत्पत्ति, स्थिति और प्रलय करना उसका काम है।

प्रश्न- परमात्मा का क्या नाम है?
उत्तर-परमात्मा का नाम ‘ओ३म्’ है ।

प्रश्न – ‘ओ३म्’ नाम में कितने अक्षर हैं ?
उत्तर- ‘ओ३म्’ नाम में तीन अक्षर हैं- अ, उ और म्। ॐ संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक है, ‘अ’ का अर्थ है उत्पन्न होना, ‘उ’ का विकास और ‘म्’ का अर्थ मौन (ब्रह्मलीन) हो जाना हैं।

प्रश्न- क्या परमात्मा मनुष्य बन जाते है ?
उत्तर- कभी नहीं। यदि वह मनुष्य बन जाये तो हम जैसा मरने वाले बन जावे ।


प्रश्न- आर्य समाज को किसने बनाया है ?
उत्तर- श्री 108 स्वामी दयानन्द सरस्वती ने ।

प्रश्न- आर्य समाज को स्वामी जी ने क्यों बनाया ?
उत्तर- वेदों का प्रचार करने के लिए ।

प्रश्न- स्वामी जी कौन थे ?
उत्तर-स्वामी जी ब्राह्मण सन्यासी थे।

प्रश्न- स्वामी जी के गुरु कौन थे ?
उत्तर- स्वामी जी के गुरु श्री स्वामी विरजानन्द जी महाराज थे।

प्रश्न- स्वामी जी की जन्म-भूमि कौन सी है ?
उत्तर- स्वामी जी की जन्म भूमि गुजरात काठियावाड़ में टंकारा ग्राम है ।

प्रश्न- उनके गुरु स्वामी विरजानन्द जी की जन्म-भूमि कौन सी है ?
उत्तर- जगरांवा पंजाब में स्वामी विरजानन्द जी उत्पन्न हुए थे।

प्रश्न- स्वामी दयानन्द जी ने किस जगह विद्या ग्रहण करी?
उत्तर- स्वामी विरजानन्द जी मथुरा नगर में रहते थे, वहीं पर दयानन्द जी ने उनसे विद्या ग्रहण करी।

प्रश्न- आर्य लोगों का धर्म क्या है ?
उत्तर- वेदों का पढ़ना-पढ़ाना और सुनना-सुनाना आर्यों का परम धर्म है।

प्रश्न- वेदों में क्या लिखा है?
उत्तर- वेदों में मनुष्य को क्या-क्या करना चाहिए वह सब कुछ लिखा है ।

प्रश्न- सब मनुष्यों के करने वाले काम कौन-कौन से हैं ?
उत्तर- पंचयज्ञ से लेकर समाधी तक।

प्रश्न- पंचयज्ञ कौन से हैं ?
उत्तर- ब्रह्मयज्ञ, देवयज्ञ, पितृयज्ञ अधितियज्ञ और बलिवैश्व देवयज्ञ ये पंचयज्ञ हैं।

प्रश्न- समाधी लगाने से क्या लाभ होता है ?
उत्तर- समाधी लगाने से परमेश्वर के दर्शन होते हैं।

प्रश्न- परमेश्वर के दर्शन से क्या लाभ होता है ?
उत्तर- परमेश्वर के दर्शन से मुक्ति हो जाती है ।

प्रश्न- समाधी कौन लगाते हैं?
उत्तर- योगी लोग समाधी लगाते हैं ।


प्रश्न- ‘ब्रह्मयज्ञ’ किसको कहते हैं ?
उत्तर- वेद पाठ, जप और सन्ध्या करने को ब्रह्मयज्ञ कहते हैं ।

प्रश्न- देवयज्ञ’ किसको कहते हैं ?
उत्तर- अग्निहोत्र से लेकर अश्वमेधयज्ञ पर्यन्त को देवयः कहते हैं ।

प्रश्न- ‘पितृयज्ञ’ किसे कहते हैं ?
उत्तर- माता-पिता, दादी-दादा, नानी-नाना, गुरु, आचार्य और अन्य वृद्धों की सेवा करने को पितृयज्ञ कहते हैं।

प्रश्न- ‘अतिथि यज्ञ’ किसे कहते हैं ?
उत्तर- जिसके आने की कोई तिथि निश्चित न हो, ऐसा विद्वान ब्राह्मण व सन्यासी अपने स्थान पर आ जाये, उनकी सेवा को अतिथि यज्ञ कहते हैं।

प्रश्न- ‘बलिवैश्वदेव यज्ञ’ किसको कहते हैं ?
उत्तर- गृहस्थ में रहकर जो हिसा होती है, उसको दूर करने के लिए अग्नि में जो भोजन के ग्रास डाले जाते हैं अथवा कुत्तों, कौवों, कृमि आदि को खिलाया जाता है, उसको बलिवैश्वदेव यज्ञ कहते हैं।

प्रश्न- इन यज्ञों के करने से क्या लाभ होता है ?
उत्तर- पंचयज्ञ करने से मनुष्य मुक्ति पाने योग्य हो जाता है ।


प्रश्न:- मुक्ति व मोक्ष किसको कहते हैं ?
उत्तर- दुःखों से छूटने को मुक्ति व मोक्ष कहते हैं।

प्रश्न- ईश्वर निराकार है या साकार ?
उत्तर- ईश्वर निराकार हैं।

प्रश्न- निराकार किसे कहते हैं?
उत्तर- जिसका कोई आकार न हो।

प्रश्न- साकार किसको कहते हैं ?
उत्तर- एक से अधिक भागों के मिलने को साकार कहते हैं।

प्रश्न- ईश्वर को साकार माने तो क्या हानि है ?
उत्तर- साकार पदार्थ नष्ट होने वाला होता है इसलिए ईश्वर भी नाशवान हो जायेगा. साकार पदार्थ एक देशी (सावयव) होता है। ईश्वर सर्वव्यापक है और केवल एक ही है ।

प्रश्न- देवता किसको कहते हैं ?
उत्तर- जो दूसरों को अच्छे गुण दे वह देवता कहलाता है।

प्रश्न- वे देवता जड़ हैं या चेतन ?
उत्तर-अग्नि, वायु, जल, पृथ्वी, आकाश, सूर्य, चन्द्र, नक्षत्र – ये 8 वसु, 11 रुद्र, 12 आदित्य, एक विद्वत और एक यज्ञा, ये 33 देवता जड़ हैं और विद्वान मनुष्य चेतन देवता है।

प्रश्न- श्राद्ध किसको कहते हैं ?
उत्तर- श्रद्धापूर्वक जीवित माता पितादि को भोजन कराने आदि को श्राद्ध कहते हैं ।

प्रश्न- तर्पण किसे कहते हैैं?
उत्तर- जल, दूध, भोजन और वस्त्र आदि से तृप्त करने को तर्पण कहते हैं।

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पाठकों का आग्रह था, कि आर्य समाज पर लेख लिखा जाये। जिससे लोगो की जिज्ञासा शांत हो सकें। जिसका परिणाम आपके समक्ष ‘आर्य समाज प्रश्नोत्तरी’ के रुप में प्रस्तुत है। यदि आपको यह लेख पसंद आया हो तो इसे शेयर करना न भूलें..🙏


 

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Last Updated on 05/12/2020