मणिबंध रेखा (Bracelet Line) | हस्तरेखा

मणिबंध रेखा (Bracelet Line in Hindi)

कलाई पर पाए जानी वाली रेखा को मणिबंध रेखा (Bracelet Line) कहते है। ये रेखाएं संख्या में 1 से लेकर 3 तो कभी कभी 4 तक पायी जाती है।

बेंहम अनुसार – “प्रथम मणिबंध रेखा के सिवा शेष दो रेखाओं का कोई उपयोग नहीं होता।” हम यह तो नही कह सकते अन्य रेखा का कोई महत्व नही है परन्तु प्रथम रेखा का महत्व जरूर अधिक होता है।

प्राचीन हस्तरेखा शास्त्रीय परम्परा के अनुसार प्रत्येक मणिबन्ध व्यक्ति की आयु में 30 वर्ष के जुड़ जाने का संकेत है, परन्तु वर्तमान समय मे ऐसा अनुभव में नही देखने को मिलता। ऐसे ही बहुत सारी धारणाएं प्राचीन पुस्तकों में मिलते है। जो प्रामाणिक नहीं हैं, अतः उन सब धारणाओं का उल्लेख यहां नही किया जा रहा है।


मणिबंध रेखा से जुड़े तथ्य

गहरी मणिबंध रेखा

मणिबन्ध की प्रथम रेखा का गहरा होना संकेत देता है कि व्यक्ति का शरीर सुदृढ़ और सुगठित है। गहरी जीवन रेखा के साथ साफ-सुथरी और सुस्पष्ट मणिबन्ध रेखा को व्यक्ति में अतिरिक्त शक्ति होने का प्रतीक समझना चाहिए। इसके विपरीत मणिबन्ध रेखा की बनावट का दोषपूर्णः श्रृंखलाकार, चौड़ी-सतही होना व्यक्ति में अपेक्षित शारीरिक शक्ति के अभाव का सूचक है।

ऊपर की और निकलती रेखा

मणिबन्ध रेखाओं से ऊपर की ओर निकलती छोटी-छोटी शाखाओं से सूचित होता है कि व्यक्ति में जीवन में उन्नति करने की प्रबल इच्छा है। उसमें परिश्रम करने की प्रवृत्ति है तथा असफल होने पर सुधार की विलक्षण क्षमता है।

यात्रा रेखा (Travel Line)

यदि यह रेखा बहुत ऊंची उठकर चन्द्र पर्वत में प्रवेश कर जाए तो यह ‘यात्रा रेखाएं’ कहलाती हैं। ये व्यक्ति में यात्रा पर्यटन की इच्छा को जागृत करके उसे आकुल-व्याकुल करती हैं।

चन्द्रप्रधान व्यक्ति यात्रा रेखाओं से विशेष प्रभावित होते हैं। वे किसी भी मूल्य पर हाथ में आये यात्रा के अवसर को खोना नहीं चाहते। इसी सन्दर्भ में यात्रा रेखाओं का सफल अधययन करना चाहिए। यहां यह भी स्मरणयीय है कि यात्रा रेखाएं अपनी लम्बाई से व्यक्ति में यात्रा की अधीरता की मात्रा को तथा यात्रा की लम्बाई को सूचित करती हैं।

यात्रा रेखाओं के दिखने पर यात्रा के प्रकार की जानकारी होने पर उनका सही उपयोग किया जा सकता है हम ऊपर लिख चुके हैं कि चन्द्र प्रधान व्यक्ति यात्रा के लिए सर्वाधिक उत्सुक रहते हैं दूसरा क्रम बुध प्रधान व्यक्तियों का है। मंगल प्रधान, बृहस्पति प्रधान और सूर्य प्रधान व्यक्तियों को पर्यटन अच्छा अवश्य लगता है, परन्तु उनकी यात्राएं व्यवसायपरक होती हैं। वे आर्थिक समृद्धि के लिए ही घर से बाहर निकलते हैं। शनि प्रधान व्यक्ति ज्ञान की खोज में और शुक्र प्रधान व्यक्ति केवल मनोरंजन के लिए यात्राओं में रुचि लेते हैं।

यात्रा रेखाओं के साथ अंगुलियों के अग्रभागों के चमचाकार होने से उपर्युक्त तथ्यों की पुष्टि हो जाती है। कोमल हाथों वाले व्यक्तियों की यात्रा का उद्देश्य केवल मन की संतुष्टि होता है। जीवन रेखा से निकली और यात्रा रेखा की ओर गयी शाखा सं व्यक्ति द्वारा व्यवसाय से विमुख हो जाना संकेतित होता है।

वह व्यवसाय धन्धे को छोड़कर पठन-पाठन में प्रवृत्त हो गया और फिर ऐसी घुन जगी कि ज्ञान की खोज में अलख जगाने लग पड़ा। ऐसे व्यक्ति अधिक यात्रा के शौकीन नहीं होते। यात्रा रेखाओं की पहली रेखा के मणिबन्ध रेखा से निकलने के कारण इन्हें मणिबन्य रेखाओ का अंग समझना सर्वथा उपयुक्त ही है।

धनुषाकार मणिबंध रेखा

बीचों-बीच निकलती मणिबन्ध रेखा व्यक्ति के उदर से सम्बन्ध रखने वाले भीतरी अंगों की शोचनीय स्थिति को उजागर करती है यह महिलाओं के प्रजनन अंगों की दुर्बलता और इस कारण प्रसवकाल में होने वाले कष्टों को उजागर करती है। फूली हुई मणिबन्ध रेखा निचले चन्द्र पर्वत से अथवा बुध रेखा से मिलने वाले स्त्री रोग के संकेत की पुष्टि करती है।

विवाह के सफल-असफल रहने की सम्भावना पर विचार करते समय इन संकेतों का विशेष महत्व होता है। महिलाओं के सम्बन्ध में यह बांझपन का निश्चित संकेत न होते हुए भी विकृत परिणाम दिखाने वाले दोषपूर्ण अंग होने का सूचक अवश्य है।


Last Updated on 11/01/2021