फिश पेडीक्योर फायदा या नुकसान?

फिश पेडीक्योर (Fish Pedicure In Hindi)

आजकल पैरों की सेहत और सुंदरता बनाए रखने के लिए लोग फिश पेडीक्योर (Fish Pedicure / Fish Spa) की तरफ ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं। भारत मे भी पिछले कुछ सालों से फिश पेडीक्योर का चलन काफी बढ़ रहा हैं।

आजकल लगभग सभी मोल्स में फिश पैडीक्योर की सुविधा उपलब्ध है, और यह ज्यादा महंगा भी नहीं होता है कुछ स्पा वाले तो घर-घर जाकर भी फिश पेडीक्योर करते है।

फिश पेडीक्योर क्या है (What is Fish Pedicure or Fish Spa)

फिश पेडीक्योर (Fish Pedicure / Fish Spa) एक तरह की थेरेपी है. जिसमें पैरों को मछलियों से भरे एक टब में डाला जाता है. और उसमें मौजूद छोटी छोटी मछलियां पैरो की डेड स्किन को खा जाती हैं।

फिश पेडीक्योर कराने से जिससे पैर की स्किन मुलायम औऱ ग्लोइंग हो जाती है। रक्त संचार बढ़ने से पैरों के दर्द से भी आराम मिलता है। ऐसा माना जाता है कि एक्जिमा और सोरायसिस जैसी बीमारियों में भी फिश पेडीक्योर काफी लाभकारी होता हैं। हालांकि इन दावों को अभी तक साबित नहीं किया जा सका है।


गारा रूफा मछली (Garra rufa Fish)

फिश पेडीक्योर के लिए गारा रूफा (garra rufa) मछली का इस्तेमाल किया जाता है, यह मछली मुख्यतः ईरान (Iran), इराक (Iraq), सीरिया (Syria) और टर्की (Turkey) में पायी जाती है। और टर्की से ही दुनिया भर के देशों में मंगवाई जाती है।

गारा रुफ़ा मछली के दांत नहीं होते। इसलिए यह हमें काट नही पाती, सिर्फ डेड स्किन को ही नोच-नोच कर ही खा पाती है। इसलिए स्पा कराते वक्त हमे दर्द का अहसास नहीं होता और हमारे पैर सुन्दर ओर ग्लोइंग दिखने लगते हैं।


फिश पेडीक्योर करवाते वक्त सावधानी (Keep these things in mind before taking Fish Spa)

आगर आप भी फिश पेडीक्योर करवाना चाहते है, तो फिश पेडीक्योर करवाने से पहले इन जरूरी बातों का ध्यान अवश्य कर लें, वरना इसका असर आपकी सेहत पर पड़ सकता है।

पानी साफ है या नही ? (Is the water clean or not)

फिश पेडीक्योर करवाते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि पानी दूषित न हो और हर रोज़ बदला जाता हो। अगर यदि प्रत्येक सैशन के बाद बाद पानी नहीं बदला जाता है, तो संक्रमण होने का खतरा बना रहता हैं।

मोल्स में कई बार लोग एक ही टैंक में कई लोग एक साथ पैर डालकर पेडीक्योर करवाते हैं। यह तभी सुरक्षित हो सकता है। जब वहां पर काफी हद तक साफ सफाई का ख्याल रखा जाए।

आपके पैर में छाले या चोट तो नही? (Do you have blisters or cuts on your feet)


अगर आपके पैर में चोट लगी हो तो या पैर कही से कटा हुआ तो आपको फिश पेडीक्योर नहीं करवाना चाहिए। इससे आपके पैर में जख्म बन सकता है। इससे आपको इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है, ऐसा भी संभव है कि आप किसी आप दूसरे को इंफेक्शन कर दें।

अगर फिश पेडीक्योर करवाते वक्त आपके पैर से खून निकलने लगे तो पैर को तुरंत बाहर निकाले और एंटीसेप्टिक दवाई लगाना चाहिए।

शुगर या गंभीर बीमारी न हो (If you have any of these medical conditions. Then avoid fish spa)

यदि आपकी इम्युनिटी कमजोर है या आप मधुमेह (Diabetes) जैसी गंभीर बीमारी से पीड़ित है। तो आपको फिश पेडीक्योर नहीं करवाना चाहिए क्योंकि संभावना है कि टैंक में उपस्थित मेक्रो बैक्टीरिया के कारण आपको इंफेक्शन हो जाए या आप किसी और को इंफेक्शन कर दें।

फिश पेडीक्योर से जुड़े विवाद (Fish Pedicure Controversies)

यह सच है कि फिश पैडीक्योर बहुत कम समय मे काफी लोकप्रिय हो गया है मगर इसके साथ बहुत सारे विवाद भी जुड़े है। जिसके बारे में आपको जरूर अवगत होना चाहिए।

मछलियों के लिए सही नहीं (Not good For Fish)

फिश पेडीक्योर के साथ एक विवाद का विषय यह भी है कि इसमे मछली हमारे पैर का डेड सेल्स खाता है, जो उसका भोजन नही है। चूंकि मछली को भूखा रखा जाता है इसलिए वह मजबूरी में जीवित रहने के लिए हमारे डेड स्किन को खाती है। जो मछली के लिए सही नही है।

विश्व भर के कई देशों में पाबंदी (Why have some states banned fish pedicure?)

जी, हां। फिश पेडीक्योर को कई देशों में पाबंदी है। एक बहुत बड़े पक्ष का मानना है कि ये मछलियां अपने साथ बैक्टीरिया भी कैरी करती हैं। जिससे आपको इंफेक्शन और निमोनिया का खतरा रहता है। इसके अलावा स्पा वाले पेडीक्योर ट्यूब के पानी को भी नही बदलते जिससे बैक्टीरिया पनपने का खतरा रहता है।

ऐसा भी हो सकता है कि मछलियां पैर पर इतना ज्यादा डीप कट कर दें कि पैरों से खून भी निकल आये। दूसरी तरफ नए अध्ययनों से पता चला है कि ये मछलियां संक्रमण एवं बीमारियां फैलाने वाले जीवाणुओं को भी अपने साथ कैरी करती है। इसलिए कई पश्चिमी देशों के राज्यों ने इस पर बैन लगा रखा है।


आपको फिश पेडीक्योर करवाना चाहिए या नही, ये तो आपके ऊपर है। लेकिन हमने इसके लाभ-हानि जरूर बता दिए है। उम्मीद करते है, आपको लेख पसंद आया होगा।


Last Updated on 30/12/2020