Latur (Maharashtra): History & Places To Visit in Hindi
लातूर (Latur) भारत के महाराष्ट्र राज्य के लातूर ज़िले में स्थित एक नगर है। यह ज़िले का मुख्यालय भी है।
Contents
- 1 Latur: History, Facts & Tourist Places | wiki
- 2 उदयगिरि (Udayagiri)
- 3 औसा (Ausa)
- 4 अहमदपुर (Ahmedpur)
- 5 कसर सिरसी (Kasar Sirsi)
- 6 नीलंगा मंदिर (Nilanga Temple)
- 7 नामानंद महाराजा का आश्रम (Namanand Maharaj Ashram Latur Maharashtra)
- 8 खरोसा (Kharosa)
- 9 शिरूर अनतपाल (Shirur Anantpal)
- 10 चाकुर (Chakur)
- 11 लातूर भूकंप (1993 Latur Earthquake)
- 12 लातूर कैसे पहुंचें (How To Reach Latur)
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Latur: History, Facts & Tourist Places | wiki
राज्य | महाराष्ट्र |
क्षेत्रफल | 32.56 km² |
भाषा | मराठी, हिंदी और इंग्लिश |
दर्शनीय स्थल | उदयगिरि, औसा, अहमदपुर, नीलंगा मंदिर आदि। |
कब जाएं | अक्टूबर से मार्च। |
लातूर महाराष्ट्र प्रान्त का एक शहर है। महाराष्ट्र के दक्षिणी सिरे में स्थित लातूर एक ऐतिहासिक स्थल है। इसे दक्षिण काशी के नाम से भी जाना जाता है। पंचगंगा नदी के तट पर बसे इस जिले में भारतीय पुराणों में वर्णित देवी महालक्ष्मी का मंदिर है जो भारत के प्रमुख शक्तिपीठों में एक है।
मूल नगर को राष्ट्रकूट राजा अमोघवर्ष ने विकसित किया था। लेकिन वर्तमान नगर को बसाने का श्रेय छत्रपति साहू महाराज को जाता है। यह जिला महाराष्ट्र के नांदेड, परभानी, बीड, ओसमानाबाद और कर्नाटक के बीदर जिले से चहुं ओर से घिरा हुआ है।
तेजी से विकसित होता यह जिला महाराष्ट्र के प्रमुख वाणिज्यिक केन्द्रों में एक है। प्राचीन सांस्कृतिक विरासत को संजोए इन जिले में अनेक खूबसूरत मंदिरों और ऐतिहासिक इमारतों को देखा जा सकता है।
उदयगिरि (Udayagiri)
उदयगिरि या उदगीर लातूर जिले का एक बेहद महत्वपूर्ण नगर है। ऐतिहासिक दृष्टि से लोकप्रिय इस नगर में ही 1761 में मराठा और हैदराबाद के निजाम का युद्ध हुआ था। सदाशिवराव भाऊ के नेतृत्व में लड़े गए इस युद्ध में निजाम की पराजय हुई और उन्हें उदगीर की संधि पर दस्तखत करने पड़े थे।
उदगीर का किला यहां के इतिहास और सांस्कृतिक धरोहर का प्रत्यक्ष प्रमाण है। भूतल पर बने इस किले के चारों ओर 40 फीट गहरी खाई है। किले के भीतर कुछ महल, दरबार हॉल, उदयगीर के महाराज की समाधि बनी हुई है। किले के भीतर अरबी और फारसी में खुदे अभिलेख भी देखे जा सकते हैं।
औसा (Ausa)
लातूर से 20 किमी. दूर स्थित औसा एक ताल्लुक मुख्यालय है। यहां एक प्राचीन किला बना हुआ है जो वर्तमान में जर्जरावस्था में है। बीरनाथ महाराज का मंदिर यहां का मुख्य आकर्षण है। इसे उनके पुत्र मल्लीनाथ महाराज ने 300 साल पहले बनवाया था।
अहमदपुर (Ahmedpur)
अहमदपुर लातूर जिले एक ताल्लुक मुख्यालय है। इस स्थान पर अक्कलकोट के गुरू स्वामी समर्थ की समाधि स्थित है। नगर में माहुर की रेणुकादेवी, महादेव, दत्ता और बालाजी के मंदिर भी देखे जा सकते हैं।
कसर सिरसी (Kasar Sirsi)
ओसमानाबाद जिले की सीमा के निकट स्थित यह एक छोटा लेकिन ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नगर है। यहां होने वाली खुदाई से अनेक धर्मग्रंथ प्राप्त हुए हैं जिनका संबंध लगभग 696-697 ई. के आसपास से है।
नीलंगा मंदिर (Nilanga Temple)
यह मंदिर लातूर से 50 किमी. दूर दक्षिण पूर्व दिशा में स्थित है। हेमदशली में बने इस मंदिर का निर्माण 12वीं से 13वीं शताब्दी के बीच हुआ था। मंदिर में एक आकर्षक शिवलिंग स्थापित है। तारे के आकार में बने इस मंदिर के कई किनारे हैं। मंदिर का मुख्य द्वार मानवीय आकृतियों और ज्यामिति डिजाइन से सुसज्जित है।
नामानंद महाराजा का आश्रम (Namanand Maharaj Ashram Latur Maharashtra)
यह आश्रम लातूर से 8 किमी. दूर महापुर में स्थित है। महाराज की समाधि देखने के लिए हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। आश्रम के निकट से ही मंजरा नदी बहती है जिसके एक द्वीप पर दत्ता मंदिर स्थित है। नदी और यहां का हरा भरा वातावरण आश्रम को और अधिक आकर्षक बना देता है।
खरोसा (Kharosa)
यह गांव लातूर शहर से 45 किमी. की दूरी पर स्थित है जो अपनी गुफाओं के लिए चर्चित है। यहां नरसिंह, शिव पार्वती, कार्तिकेय तथा रावण की सुंदर मूर्तियां देखी जा सकती हैं। इतिहासकारों के अनुसार सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक इस गांव की गुफाओं को छठी शताब्दी में गुप्त काल के दौरान बनवाया गया था।
शिरूर अनतपाल (Shirur Anantpal)
यह नवनिर्मित ताल्लुक 11वीं शताब्दी में बने भगवान शिव के मंदिर के कारण जाना जाता है। शिवलिंग और देवी महिषासुरमर्दिनी की मूर्ति को बेहद खूबसूरती के साथ काले पत्थर से बनाया गया है।
मंदिर के किनारों और आसपास विभिन्न देवी-देवताओं की आकृतियां उकेरी गई हैं। माना जाता है कि हर वर्ष यहां ढाई लाख श्रद्धालु दर्शन हेतु आते हैं। चैत एकादश और द्वादशी के मौके पर यहां बड़ी धूमधाम से उत्सव मनाए जाते हैं।
चाकुर (Chakur)
लातूर-नांदेड मार्ग पर स्थित चाकुर ताल्लुक लातूर शहर से 35 किमी. की दूरी पर है। चाकुर के निकट ही भगवान शिव का एक मंदिर और मनोरंजन पार्क है, जहां सदैव लोगों का आना जाना लगा रहता है। चाकुर से लगभग 16 किमी दूर वडवाल नागनाथ बेट पहाड़ी है, जो अनेक प्रकार के आयुर्वेदिक पौधों और जड़ी-बूटियों के लिए खासी चर्चित है। यह पहाड़ी भूमि से 600-700 फीट की ऊंचाई पर है।
लातूर भूकंप (1993 Latur Earthquake)
30 सितंबर, 1993 को लातूर में एक विनाशकारी भूकंप आया जिससे बड़ी संख्या में लोग मारे गए। यद्यपि रिक्टर पैमाने पर भूकंप की तीव्रता 6.3 थी लेकिन फिर भी 30000 से अधिक लोग काल के गाल में समा गए, जिसका मुख्य कारण गाँव के मकानों और झोपड़ियों का ठीक से निर्माण ना किया जाना था।
घरों की छ्तें पत्थरों की बनीं हुईं थी जो तड़के सो रहे लोगों पर गिर पड़ी। यह भूकंप महाराष्ट्र के दक्षिणी मराथवाड़ा क्षेत्र में आया था और इसका प्रभाव लातूर, बीड, ओस्मानाबाद, और निकटवर्ती क्षेत्रों में पड़ा जो मुम्बई से 400 किमी दक्षिण-पूर्व में स्थित है। यह एक अंतर-प्लेट भूकंप था। लातूर लगभग पूरा बरबाद हो गया था और जीवन ठहर सा गया था।
भूकंप का केन्द्र धरती से 12 किमी नीचे था जो अपेक्षाकृत कम गहराई का भूकम्प था जिससे भूकंपीय तरंगूं ने और क्षति पहुँचाई। मरने वालों की संख्या इसलिए अधिक थी क्योंकि भुकंप स्थानीय समयानुसार सुबह 3:53 पर आया था जब लोग अपने घरों में सो रहे थे।
लातूर कैसे पहुंचें (How To Reach Latur)
वायु मार्ग – औरंगाबाद विमानक्षेत्र यहां का निकटतम एयरपोर्ट जो लगभग 290 किमी. की दूरी पर है। यह एयरपोर्ट मुंबई और अन्य बहुत से शहरों से जुड़ा हुआ है।
रेल मार्ग – लातूर रोड स्थित रेलवे स्टेशन यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन है, जो ब्रोड गेज और नैरो गेज रेललाइन के द्वारा महाराष्ट और अन्य पड़ोसी राज्यों से जुड़ा हुआ है।
सड़क मार्ग- लातूर सड़क मार्ग द्वारा महाराष्ट्र और पडोसी राज्यों के अनेक शहरों से जुड़ा है। राज्य परिवहन निगम की अनेक बसें नियमित रूप से लातूर के लिए चलती रहती हैं।