माँ बगलामुखी (महाविद्या-8)

माता बगलामुखी (Goddess Baglamukhi) दस महाविद्याओं में आठवीं महाविद्या हैं। इन्हें माता पीताम्बरा भी कहते हैं। ये स्तम्भन की देवी हैं। सम्पूर्ण सृष्टि में जो भी तरंग है वो इन्हीं की वजह से है।

दस महाविद्याओं में सबसे अधिक प्रसिद्ध प्रचलित एवं प्रभावी साधना बगलामुखी देवी की है।


बगलामुखी या पीताम्बरा देवी (महाविद्या-8)

नामबगलामुखी या पीतांबरा देवी
मूल नामवगलामुखी
भैरवमृत्युंजय
कुलश्री कुल
स्वभाव सौम्य-उग्र
दिशा पश्चिम
रंगपिला
अस्त्रतलवार, गधा
जन्म/जयंतीवैशाख शुक्ल अष्टमी।
कार्य सिद्धि शत्रु-विपत्ति-निर्धनता नाश तथा कचहरी कोर्ट
मंत्रऊँ ह्नीं बगुलामुखी देव्यै ह्नीं ओम नम:।

बगलामुखी का महाविद्या में आठवाँ स्थान है। श्री बगलामुखी को ‘ब्रह्मास्त्र’ के नाम से भी जाना जाता है। ऐहिक या पारलौकिक देश अथवा समाज में दुःख,अरिष्टों के दमन और शत्रुओं के शमन में बगलामुखी के समान कोई मन्त्र नहीं है। चिरकाल से साधक इन्हीं महादेवी का आश्रय लेते आ रहे हैं।

यजुर्वेद की काठक संहिता के अनुसार बगलामुखी दसों दिशाओं को प्रकाशित करने वाली, सुन्दर स्वरूप धारिणी और जगत की ईश्वरी है।

बगलामुखी का अर्थ (Meaning of Baglamukhi in Hindi)

बगला शब्द संस्कृत भाषा के ‘वल्गा’ का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ होता है दुल्हन। अन्य मत से वगला नाम तीन अक्षरों से निर्मित है व, ग, ला; ‘व’ अक्षर वारुणी, ‘ग’ अक्षर सिद्धिदा तथा ‘ला’ अक्षर पृथ्वी को संबोधित करता है।


बगलामुखी उत्तप्ति कथा (Maa Baglamukhi Story In Hindi)

भगवती बगलामुखी के प्रादुर्भाव की कथा इस प्रकार है- एक बार सत्ययुग में सम्पूर्ण जगत को नष्ट करनेवाला भयंकर तूफान आया। इसकी तीव्रता और इससे होने वाली हानियों की कल्पना करके भगवान् विष्णु चिन्तित हो गये।

इस विषय में अन्य कोई उपाय न समझकर उन्होंने सौराष्ट्र नामक प्रान्त में हरिद्रा सरोवर के समीप भगवती को प्रसन्न करनेके लिये तप करने लगे। श्री विद्या ने उस सरोवर से वगला मुखी रूप में प्रकट होकर उन्हें दर्शन दिया तथा विध्वंसकारी तूफानका तुरन्त स्तम्भन कर दिया।मंगलवार युक्त चतुर्दशी की अर्धरात्रि में इनका आविर्भाव हुआ है।

देवी का प्रादुर्भाव भगवान विष्णु से संबंधित हैं। परिणामस्वरूप देवी सत्व गुण सम्पन्न तथा वैष्णव संप्रदाय से संबंध रखती हैं। परन्तु, कुछ अन्य परिस्थितियों में देवी तामसी गुण से संबंध भी रखती हैं।

बगलामुखी देवी का स्वरूप (appearance of baglamukhi in Hindi(

देवी देखने में मनोहर तथा मंद मुस्कान वाली हैं। देवी त्रिनेत्रा हैं, मस्तक पर अर्ध चन्द्र धारण करती है, पीले शारीरिक वर्ण युक्त है, देवी ने पीला वस्त्र तथा पीले फूलों की माला धारण की हुई है। देवी के अन्य आभूषण भी पीले रंग के ही हैं तथा अमूल्य रत्नों से जड़ित हैं।

देवी, विशेषकर चंपा फूल, हल्दी की गांठ इत्यादि पीले रंग से सम्बंधित तत्वों की माला धारण करती हैं। यह रत्नमय रथ पर आरूढ़ हो शत्रुओं का नाश करती हैं।

देवी ने अपने बाएं हाथ से शत्रु के जिह्वा को पकड़ कर खींच रखा है तथा दाएं हाथ से गदा उठाए हुए हैं, जिससे शत्रु अत्यंत भयभीत हो रहा है। देवी के इस जिव्हा पकड़ने का तात्पर्य यह है कि देवी वाक् शक्ति देने और लेने के लिए पूजी जाती हैं।

कई स्थानों में देवी ने मृत शरीर या शव को अपना आसन बना रखा है।


बगलामुखी उपासना (Baglamukhi Worship)

सर्वप्रथम ब्रह्माजी ने वगला महाविद्या की उपासना की थी।बगलामुखी के दूसरे उपासक भगवान् विष्णु और तीसरे उपासक परशुराम हुए। परशुराम ने यह विद्या बाद में आचार्य द्रोण को सिखाई थी।

ब्रह्माजीने इस विद्या का उपदेश सनकादिक मुनियों को किया। सनत्कुमार ने देवर्षि नारदको और नारद ने नामक परमहंस को इसका उपदेश किया।

पांडवो ने भी युद्ध से पहले की बगलामुखी पूजा

पौराणिक कथाओं में उल्लेख मिलता है कि महाभारत के युद्ध में श्रीकृष्ण की प्रेरणा पर अर्जुन ने कई जगह जाकर शक्ति की साधना की थी। जिसमे उज्जैन में हरसिद्ध माता और नलखेड़ा में बगलामुखी माता का पूजन भी किया था। वहां उन्हें युद्ध में विजयी भव का वरदान मिला था।

माँ बगलामुखी साधना (Baglamukhi Mantra in Hindi)

माँ बगलामुखी के बड़वामुखी, जातवेदमुखी, उल्कामुखी, ज्वालामुखी तथा बृहद्भानुमुखी पाँच मन्त्र भेद हैं। कुण्डिकातन्त्रमें वगलामुखी के जपके विधान पर विशेष प्रकाश डाला गया है। मुण्ड मालातन्त्र में तो यहाँ तक कहा गया है कि इनकी सिद्धिके लिये नक्षत्रादि विचार और कालशोधन की भी आवश्यकता नहीं है।

इस शक्ति की आराधना करने वाला मनुष्य अपने शत्रु को मनमाना कष्ट पहुंचा सकता है और अपने ऊपर आये कष्टों का निवारण भी कर सकता है।

बगलामुखी मंत्र:-

1. ऊँ ह्नीं बगुलामुखी देव्यै ह्नीं ओम नम:

2. ॐ ह्रीं बगलामुखि सर्वदुष्टानां। वाचं मुखं स्तम्भय जिह्वां कीलय। कीलय बुद्धिं नाशाय ह्रीं ॐ स्वाहा ॥

3. ह्मीं बगलामुखी सर्व दुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तम्भय जिह्वां कीलम बुद्धिं विनाशय ह्मीं ॐ स्वाहा।

4. बगलामुख्यै च विद्महे स्तम्भिन्यै च धीमहि तन्नो बागला प्रचोदयात।

विधि:- बगलामुखी साधना के लिए घर, मंदिर या अन्य कहीं भी एकान्त में मकान का कोई एक साफ-सुथरा कमरा चुन लेना चाहिए। साधक को पीले वस्त्र पहनने चाहिए। आसन भी पीला होना चाहिए।

ततपश्चात हल्दी की माला से आठ माला से निम्न मंत्र में से किसी भी एक मंत्र का जाप आप कर सकते हैं। देवी को पीली हल्दी के ढेर पर दीप-दान करें, देवी की मूर्ति पर पीला वस्त्र चढ़ाने से बड़ी से बड़ी बाधा भी नष्ट होती है, बगलामुखी देवी के मन्त्रों से दुखों का नाश होता है।

पूजा में कोई अनुचित चीज नहीं मांगें। जो न्यायप्रिय और सर्वप्रिय हो, उसी की कामना करें।

बगलामुखी साधना से लाभ (Benefits Of Maa Baglamukhi Jayanti Mantra Chanting)

बगलामुखी विद्या का उपयोग भोग और मोक्ष दोनों की प्राप्ति के लिए किया जा सकता है। इनकी उपासना से हर दुर्लभ वस्तु प्राप्त हो सकती है। परन्तु विशेष रूप से स्तंभन, शत्रु शमन, युद्ध, वाद-विवाद, मुकदमा, प्रतियोगिता में विजय प्राप्त करने के लिए बगलामुखी अमोघ है।

इस शक्ति की आराधना करने वाला मनुष्य अपने शत्रु को मनमाना कष्ट पहुंचा सकता है और अपने ऊपर आये कष्टों का निवारण भी कर सकता है।

बगलामुखी जयंती कब है? (Bagalamukhi jayanti In 2021)

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, बगलामुखी जयंती का अवसर वैशाख के महीने में शुक्ल पक्ष के 8 वें दिन (अष्टमी तिथि) को मनाया जाता है। ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार, यह दिन मई या अप्रैल के महीने में मनाया जाता है। इस वर्ष 2021 में यह जयन्ती 20 मई, को मनाई जाएगी


देवी बगलामुखी के प्रमुख मंदिर (Baglamukhi Famous Temple)

भारत में मां बगलामुखी के तीन ही प्रमुख शक्तिपीठ मंदिर निम्न है-

  1. पीताम्बरा पीठ, दतिया (मध्यप्रदेश),
  2. कांगड़ा (हिमाचल)
  3. नलखेड़ा जिला शाजापुर (मध्यप्रदेश)

सावधानी- बगलामुखी की साधना में पवित्रता, नियम आदि का ध्यान रखना अत्यंत आवश्यक है। इस साधना को किसी जानकार की देख रेख में ही करना चाहिए। अन्यथा हानि भी हो सकती है।


Last Updated on 04/03/2021

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