नागेश्वर ज्योतिर्लिंग | Nageshwar Jyotirlinga

नागेश्वर मंदिर (Nageshwar Jyotirlinga) भारत के गुजरात राज्य के द्वारकापुरी से 17 किमी दूरी पर स्थित है। यह शिव जी के बारह ज्योतिर्लिंग में से एक है। नागेश्वर नाग और ईश्वर शब्द से मिलकर बना है जिसका अर्थ “नागो के देवता” होता है। रुद्र सहिंता में इसे दारुकावने नागेशं कहा गया है।

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग, द्वारका (Nageshwar Temple Complete Guide)

Nameनागेश्वर
Locationद्वारका से 17 किलोमीटर (गुजरात)
Typeहिन्दू मंदिर
Statusज्योतिर्लिंग
Dedicated toभगवान शिव
Timings06:00 AM to 12.00; 05.00 PM to 09:00 PM
Aarti Timing 05:00 AM and 07:00 PM.
Entry Feeकोई शुल्क नही
Cameras, Mobile Phonesअनुमति नही
Distance from Major Transportation Hubsद्वारका रेलवे स्टेशन (17 km);
पौरबन्दर हवाई अड्डा (95 km)
Origins of the Templeप्राचीन काल (समय ज्ञात नही)
Current Structure Constructed in1996
Current Structure Constructed byगुलशन कुमार चेरिटेबल ट्रस्ट (1.25 करोड़)
Architectural Styleभारतीय मंदिर वास्तुकला
Material Usedलाल पत्थर (Red Rocks)

पौराणिक कथा (Mythological Story)

एक समय की बात है। सुप्रिय नाम का एक बड़ा ही धर्मात्मा और सदाचारी वैश्य था, जो भगवान शिव का अनन्य भक्त था। सोते- जागते, उठते-बैठते, खाते-पीते वह शिव भक्ति, शिवार्चन, में लीन रहता था।

उसी स्थान पर एक राक्षस रहता था, जो उसे शिवार्चना करते देख क्रोधित होकर उसका अहित करने की बात सोचता रहता था। एक बार नौका द्वारा सुप्रिय दूसरे नगर की जा रहा था कि दारुक नामक उस दैत्य ने उसकी नौका पर हमला करके वैश्य सहित सभी यात्रियों को पकड़ लिया तथा अपनी गुफा में ले जाकर कैद कर दिया।

वहां भी वैश्य का विश्वास डिगा नहीं। वह वहां दूसरे बंदियों को भी आश्वासन देता कि भगवान शिव हमारी रक्षा अवश्य ही करेंगे। जब सभी भगवान शिव की स्तुति करने लगे तो राक्षस बौखला गया उसने अपने अनुचरों को सभी बंदियों की हत्या करने का आदेश दे दिया।

वे कुछ कर पाते; उससे पूर्व ही उस बंदीगृह में भगवान शिव एक ऊंचे स्थान पर चमकते हुए सिंहासन पर स्थित होकर शिवलिंग के रूप में प्रकट हो गए। सुप्रिय को अपने दर्शन देकर उन्होंने उसे अपना पाशुपत अस्त्र भी प्रदान किया, जिसकी सहायता से उसने दारुक व उसके अनुचरों का वध कर दिया। तत्पश्चात वह शिवधाम को गमन कर गया।


मंदिर परिसर और वास्तुकला (Temple Complex & Acrtecture)

नागेश्वर ज्योतिर्लिंग (Nageshwar Jyotirlinga) भारत के सर्वाधिक खूबसूरत मंदिरों में से एक है। मंदिर का निर्माण लाल पत्थर से किया गया है, जो अत्यंत मनमोहक है। मंदिर परिसर के पास ही पद्मासन मुद्रा में बैठे भगवान शिव की 80 फिट लंबी प्रतिमा स्थापित है। मूर्ति के पास घूमते पक्षियों का झुंड प्राकृतिक खूबसूरती को और अधिक बढ़ा देतो है।

मंदिर के गर्भ ग्रह में स्थापित शिव लिंग के ऊपर चांदी की परत चढ़ी हुई है। लिंग के ऊपर एक चांदी का नाग भी बना हुआ है।


दर्शन और आरती समय (Nageshwar Jyotirlinga Arti Timing)

नागेश्वर मंदिर प्रातः 5 बजे आरती के साथ खुलता है। मंदिर में सुबह से पुजारियों द्वारा कई तरह की पूजा और अभिषेक किए जाते जाते है। आम जनता के लिए मंदिर 6 बजे से दोपहर 12 बजे तक खुला रहता है।

दोपहर के 4 बजे श्रगार दर्शन के बाद पुनः मंदिर भक्तों के लिए खोल दिया गया। शाम को 7 बजे संध्या की आरती होती है। उसके बाद रात्रि 9 बजे तक मंदिर खुला रहता है।

वैसे तो नागेश्वर मंदिर में साल भर भक्तों का तांता लगा रहता है, लेकिन सावन के महीने में काफी भीड़ रहती है, खासकर सावन के सोमवार को यहां भक्त भारी मात्रा में श्रद्धालु आते हैं।

गर्भगृह में स्थित शिवलिंग की पूजा-अर्चना की अनुमति सिर्फ पुरुषों को है, वह भी धोती पहनकर। बांकी भक्त दूर से ज्योतिर्लिंग के दर्शन करते है। यदि आप विशेष पूजा करवाना चाहते है, तो मंदिर समिति से संपर्क कर सकते है।


नागेश्वर मंदिर यात्रा (Nageshwar Temple Travel Guide in Hindi)

ठहरने और भोजन की व्यवस्था (Where To stay)

नागेश्वर मन्दिर शहर से दूर ओखा और द्वारका मार्ग के बीच स्थित हैं, इसलिए यहाँ ठहरने की कोई व्यवस्था उपलब्ध नहीं है। यात्रिओ को द्वारका में ठरना पड़ता है, जो यहां से 17 किलोमीटर दूर है। द्वारका में धर्मशाला, होटल, रेस्टोरेंट आदि सभी प्रकार की सुविधा उपलब्ध है।

द्वारका-नागेश्वर आवागमन के लिए टेक्सी, ऑटो रिक्शा सर्वसुलभ है।

नागेश्वर जाने का सही समय (Best time to visit Nageshwar Temple)

यूं तो नागेश्वर मंदिर भक्तों के लिए बारह महीने खुला रहता है आप कभी भी नागेश्वर के दर्शन कर सकते है। लेकिन फिर भी नवम्बर से फरवरी नागेश्वर दर्शन के लिए अच्छा समय है।

इसके अतिरिक्त सावन का पवित्र महीना और शिवरात्रि में नागेश्वर दर्शन की विशेष महिमा है।


नागेश्वर मंदिर कैसे पहुंचे (How to Reach Nageshwar Temple, Dwarka)

हवाई मार्ग (By Air)

द्वारका का निकटतम घरेलू हवाई अड्डा पौरबन्दर 95 किमी औऱ जामनगर 134 किमी दूर स्थित है। हवाई अड्डे से टैक्सी अथवा बस द्वारा द्वारका पहुँच सकते हैं।

रेल मार्ग (By Train)

नागेश्वर से द्वारका रेलवे स्टेशन मात्र 18 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। जो देश के कई प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है।

सड़क मार्ग (By Road)

द्वारका बसअड्डा नागेश्वर मंदिर से मात्र 18 किलो दूर हैं। द्वारका भारत के राजमार्ग द्वारा अच्छी प्रकार से जुड़ा हुआ है। यहां के लिए नियमित अंतराल पर गुजरात के विभिन्न शहरों से बसें मिल जाती है। निजी ट्रेवल कंपनी द्वारा द्वारका यात्रा पैकेज भी उपलब्ध है। 


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