पंचांग किसे कहते है? (What is Panchang)

हिंदू पंचांग (Hindu Panchang) को वैदिक पंचांग के नाम से भी जाना जाता है। पंचांग के माध्यम से समय एवं काल की सटीक गणना की जाती है। पंचांग मुख्य रूप से पांच अंगों से मिलकर बना होता है। ये पांच अंग तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण है।

हिन्दू पंचांग व्रत त्यौहार (Festival Holiday Calendar 2021 in Hindi)

तारीख वार पर्व-व्रतोत्सव
1 अप्रैलगुरु बैंक अवकाश, मुर्ख दिवस
2 अप्रैल
शुक रंग पंचमी। श्री जयन्ती। श्री पंचमी। शीतला षष्ठी। स्कन्द षष्ठी (बंगाल)। श्री एकनाथ षष्ठी। विजय गोविन्द हलंकर दिवस (मणिपुर)। नव चण्डी मेला प्रारम्भ (मेरठ)। गुड फ्राईडे। मंगल मृगशिरा नक्षत्र में 23/09 पर।
3 अप्रैलशनिशीतला सप्तमी व्रत,चैत्र, कृष्ण सप्तमी
4 अप्रैलरवि चैत्र कृष्ण अष्टमी, कालाष्टमी, बसोड़ा,चैत्र, कृष्ण अष्टमी, शीतला अष्टमी (आज के दिन बासी भोजन विहित है), चैत्र, कृष्ण अष्टमी, वर्षीतप आरम्भ (जैन), ईस्टर (ईसाई)
5 अप्रैलसोम गुरू कुम्भ राशि में 24/23 पर।
6 अप्रैलमंग
7 अप्रैलबुध पापमोचिनी एकादशी,चैत्र, कृष्ण एकादशी
8 अप्रैलगुरु वारूणी योग 27/16 से 28/57 तक।
9 अप्रैलशुक्र चैत्र, कृष्ण त्रयोदशी, प्रदोष व्रत। गँगा वरूणा संगम पर स्नान। मधुश्रवा त्रयोदशी। मेला पृथूदक पिहोवा तीर्थ (हरियाणा)। बुध रेवती नक्षत्र में 29/08 पर।
10 अप्रैलशनि चैत्र कृष्ण चतुर्दशी, मासिक शिवरात्रि, शुक्र अश्विनी नक्षत्र मेष राशि में 06/29 पर।
11 अप्रैलरवि चैत्र कृष्ण अमावस्या, दर्श अमावस्,अन्वाधान, चैत्र, कृष्ण चतुर्दशी
12 अप्रैलसोम स्नान दानादि की अमावस्या। सोमवती अमावस्या (आज तैल स्पर्श निषेध है)। कल्पादि। आज के दिन गंगा स्नान से सहस्त्र गायों के दान का फल प्राप्त होता है। चान्द्र सम्वत्सर 2077 (प्रमादी) विक्रमी समाप्त।
13 अप्रैलमंग शुक्ल प्रतिपदा, चैत्र मास प्रारंभ, चैत्र नवरात्रि प्रारंभ, विक्रम संवत 2078 प्रारंभ, कलश स्थापना, ध्वजा रोहण, गुड़ी पड़वा, गुरु अमरदास दिवस (सिख), आर्य समाज (स्थापना दिवस)
14अप्रैलबुध श्रृंगार (सिंधारा) देशाचार से। सिन्धी सम्प्रदाय का श्री झूलेलाल जयन्ती महोत्सव। हिजरी रमजान 9 माह शुरू। मेष संक्रान्ति,सूर्य का मीन से मेष राशि में प्रवेश (संक्रान्ति का विशेष पुण्यकाल सूर्योदय से 06/32 तक, तत्पश्चात सामान्य पुण्यकाल 08/56 से तक)। सतुआ जल कुम्भादि दान। भीमराव अम्बेडकर जयन्ती।
15 अप्रैलगुरु चैत्र, शुक्ल तृतीया, मत्स्य जयन्ती। गणगौरी व्रत। सरहुल (बिहार)। सौभाग्य शयन तृतीया। मनोरथ तृतीया व्रत। अरुन्धती व्रत-पूजन। बंगाली कैलेण्डर का पहला दिन।
16 अप्रैलशुक्र चैत्र, शुक्ल चतुर्थी, विनायक चतुर्थी व्रत, रोहिणी व्रत। गुरू अंगददेव जोति जोत। बुध अश्विनी नक्षत्र मेष राशि में 20/57 पर।
17 अप्रैलशनि चैत्र, शुक्ल पञ्चमी। लक्ष्मी पञ्चमी। श्री पंचमी। श्री गुरु हरगोविन्द सिंह जोति जोत।
18 अप्रैलरवि चैत्र शुक्ल षष्ठी, स्कन्द षष्ठी व्रत। यमुना छठ। सूर्य षष्ठी व्रत। व्रत रामानुज जयन्ती, श्री अशोक षष्टी व्रत (बंगाल)।
19 अप्रैलसोम वासन्ती दुर्गा पूजारम्भ। आयंबील (ओली) प्रारम्भ जैन। अन्नपूर्णा परिक्रमा प्रारम्भ 24/02 बजे से । अशोक कलिका प्राशन। सूर्य सायन वृष राशि में 25/54 पर। शुक्र उदय पश्चिम में 05/39 पर।
20 अप्रैलमंग चैत्र, शुक्ल अष्टमी श्री। दुर्गाष्टमी। अष्टमी का हवनादि आज ही करें। श्री महाष्टमी व्रत। श्री अशोकाष्टमी अशोक कलिका प्राशन। श्री अन्नपूर्णा परिक्रमा समाप्त 24/44 बजे। शुक्र भरणी नक्षत्र में 25/05 पर।
21 अप्रैलबुध शुक्ल नवमी, श्री रामनवमी व्रत सबका। महातारा जयन्ती, श्री स्वामी नारायण जयन्ती। श्री राम-जन्म महोत्सव (मध्यान्ह कर्क लग्न में) रामावतार। अयोध्या परिक्रमा, दर्शन पूजन। नवमी का हवनादि आज ही करें। चैत्र नवरात्र समाप्त।
22 अप्रैलगुरु श्री धर्मराम दशमी। नवरात्र व्रत का पारण। बुध भरणी में 28/25 पर। पृथ्वी दिवस।
23 अप्रैलशुक्र चैत्र, शुक्ल एकादशी। कामदा एकादशी व्रत। श्री विष्णु दोलोत्सव। सायं दोलास्ढ पूजन। बाबू कुंवर सिंह जन्म दिवस (बिहार)।
24 अप्रैलशनि चैत्र, शुक्ल त्रयोदशी। शनि प्रदोष व्रत। मदन द्वादशी। अनंग त्रयोदशी व्रत। हरि दमनोत्सव।
25 अप्रैलरवि चैत्र, शुक्ल त्रयोदशी। श्री महावीर जयन्ती (जैन)। दमनक चतुर्दशी। मीनाक्षी कल्याणम्। शिव नृसिंह दमनकोत्सव (महानिशीथ काल में)।
26 अप्रैलसोम चैत्र, शुक्ल पूर्णिमा। चैत्र पूर्णिमा व्रत। अन्वाधान,चैत्र। चित्रान्न दान-भक्षण। गुरु हरकिशन जोति जोत (सिक्ख)। श्री गुरु तेगबहादुर गुरयायी (सिक्ख)।
27 अप्रैलमंग चैत्र शुक्ल पूर्णिमा। हनुमान जयन्ती। चैत्र नवपद ओली पूर्ण, जैन कैलेण्डर पर आधारित। चांडक पूजा (बंगाल)। अन्वाधान। वैशाख कृष्ण पक्षारम्भ। वैशाख मासीय व्रत-यम-नियमादि प्रारम्भ। तुलसी पत्र से श्री विष्णु पूजा। सूर्य भरणी नक्षत्र में 18/24 पर। अगस्त्यास्त 19/37 पर।
28 अप्रैलबुध बुध उदय पश्चिम में 22/11 पर।
29 अप्रैलगुरु गुरू- बुध कृत्तिका नक्षत्र में 13 /27 पर।
30 अप्रैलशुक्र वैशाख, कृष्ण चतुर्थी। संकष्टी गणेश चतुर्थी व्रत। चन्द्रोदय 22/20 पर। अनसुइया जयन्ती।

अप्रैल महीने में विभिन्न मुहूर्त (April 2021 Muhurata)

यज्ञोपवित मुहूर्त 22, 24, 29
व्यापर मुहूर्त  1, 12, 29
द्विरागमन  मुहूर्त  24, 25, 29
विवाह मुहूर्त 24,25 26,27,30

अप्रैल महीने में ग्रह राशि परिवर्तन

ग्रह  राशि गति  अवस्था 
सूर्य  ता. 13 को 26:32 में मेष में  मार्गी  +
मंगल  ता. 13 को 2:14 पर मिथुन में. मार्गी  उदित 
बुध  ता. 16 को 20:57 को मेष में  मार्गी  28 को उदय 
गुरु  ता. 5  को 24:23 पर कुम्भ में  मार्गी  उदित
शुक्र  ता. 10 को 6:29 को मेष में  मार्गी  19  को उदय 

राहू काल विचार

  • रविवार : सायं 4:30 से 6:00 बजे तक।
  • सोमवार : प्रात:काल 7:30 से 9:00 बजे तक।
  • मंगलवार : अपराह्न 3:00 से 4:30 बजे तक।
  • बुधवार : दोपहर 12:00 से 1:30 बजे तक।
  • गुरुवार : दोपहर 1:30 से 3:00 बजे तक।
  • शुक्रवार : प्रात:10:30 से दोपहर 12:00 तक।
  • शनिवार : प्रात: 9:00 से 10:30 बजे तक।

नोट: राहू काल को अशुभ समय माना जाता है। अत: इस काल में शुभ कार्य नहीं किए जाते है।

भद्रा तिथियाँ अप्रैल 2021

दिनांक समय
3 अप्रैल05:58 AM से 5.6 PM तक
6 अप्रैल02:10 PM से 02:09 AM तक
10 अप्रैल04:27 AM से 05:12 PM तक
16 अप्रैल04:47 AM से 06:05 PM तक
19 अप्रैल12:01 AM से 12:28 PM तक
23 अप्रैल10:47 AM से 09:47 PM तक
26 अप्रैल12:44 PM से 10:53 PM तक
29 अप्रैल11:49 AM से 10:09 PM तक

नोट: भद्रा तिथि में शुभ कार्य करना निषेध हैै।

पंचक विचार 2021

हिन्दू पंचांग अनुसार प्रत्येक माह में पांच ऐसे दिन आते हैं जिनका अलग ही महत्व होता है। ‘मुहूर्त चिंतामणि’ के अनुसार घनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद तथा रेवती ये नक्षत्र पर जब चन्द्रमा गोचर करते हैं तो उस काल को पंचक काल कहा जाता है।पंचक निर्माण तभी होता है जब चन्द्रमा कुंभ और मीन राशि पर गोचर करते हैं।

शास्त्रों के अनुसार, पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करना वर्जित माना जाता है। 1. लकड़ी एकत्र करना या खरीदना। 2. मकान पर छत डलवाना। 3. शव जलाना 4. पलंग या चारपाई बनवाना 5. दक्षिण दिशा की ओर यात्रा करना। इन कामों को छोड़कर आप कोई भी काम कर सकते हैं। वह शुभ माना जाता है।

उपाय:- पंचक में शव दाह करते समय पांच पुतले बनाकर उन्हें भी आवश्य जलाएं। यदि पलंग या चारपाई बनवाना जरुरी हो तो पंचक काल की समाप्ति के पश्चात ही प्रयोग करें।यात्रा अनिवार्य हो तो हनुमान मंदिर में प्रसाद चढ़ाकर यात्रा प्रारंभ करें।

पंचक प्रारंभ पंचक अंत
7 अप्रैल 03:00 PM से 12 अप्रैल 11:30 AM तक
4 मई 08:44 PM से 9 मई 05:29 PM तक
1 जून 03:59 AM से 5 जून 11:28 PM तक
28 जून 01:00 PM से 3 जुलाई 06:14 AM तक
25 जुलाई 10:48 PM से 30 जुलाई 02:03 PM तक
22 अगस्त 07:57 AM से 26 अगस्त 10:29 PM तक
18 सितम्बर 03:26 PM से 23 सितम्बर 06:44 AM तक
15 अक्टूबर 09:16 PM से 20 अक्टूबर 02:02 PM तक
12 नवम्बर 02:52 AM से 16 नवम्बर 08:15 PM तक
9 दिसंबर 10:10 AM से 14 दिसम्बर 02:05 AM तक

सूर्य-चन्द्र ग्रहण विवरण (2021)

इस वर्ष में कुल 4 ग्रहण होंगे। 2 सूर्य ग्रहण और 2 चंद्र ग्रहण।

सूर्य ग्रहण (Solar Eclipse 2021)

  1. 10 जून 2021 (ज्येष्ठ अमावस्या) – दोपहर 1:42 से शाम 6:41 तक (कुल अवधि 4 घटे 50 मि.) दृश्य स्थान: उत्तरी अमेरिका, यूरोप, एशिया, भारत। कुंडलाकार सूर्य ग्रहण
  2. 4 दिसंबर 2021 (सं. 2078 मार्गशीर्ष अमावस्या)-  प्रातः 10:20 से दोपहर 3: 47  तक (कुल अवधि-04 घंटे 08 मि) दृश्य स्थान: अंटार्कटिका, द. अफ्रीका, द. अटलांटिक, प्रशांत महासागर पूर्ण सूर्य ग्रहण (भारत में अदृश्य)

चन्द्र ग्रहण (Lunar Eclipse 2021)

  1. 26 मई 2021 (सं. 2076, पैशाख पूर्णिमा)- दोपहर 2:17 से सांय 7:15 तक (कुल अवधि 05 घंटे 02 मि) दृश्य स्थान पू. एशिया, आस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर अमेरिका, भारत। पूर्ण चंद्रग्रहण
  2. 19 नवम्बर 2021 (सं. 2074 कार्तिक पूर्णिमा) –  प्रातः 11: 2 से सांय 05: 1 तक (कुल अवधि 6 घंटे 1 मि.) दृश्य स्थान : अमेरिका उ. यूरोप, पू एशिया, आस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर, भारत। आंशिक चन्द्रग्रहण