पापांकुशा एकादशी : व्रत कथा, मुहूर्त एवं पूजा विधि

आश्विन शुक्ल एकादशी को ‘पापांकुशा एकादशी’ के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन व्रत-पूजन करने से अधूरी मनोकामनाएं विष्णु भगवान अवश्य पूरी करते है। इस वर्ष पापांकुशा एकादशी शनिवार, 16 अक्तूबर को है।


पापांकुशा एकादशी व्रत

आधिकारिक नामअजा एकादशी व्रत
तिथिआश्विन शुक्ल एकादशी
अनुयायीहिन्दू
प्रकारव्रत
उद्देश्यसर्वकामना पूर्ति
सम्बंधित लेखएकादशी व्रत

पापांकुशा एकादशी व्रत कथा

युधिष्ठिर ने पूछा: हे मधुसूदन ! अब आप कृपा करके यह बताइये कि आश्विन के शुक्लपक्ष में किस नाम की एकादशी होती है और उसका माहात्म्य क्या है ?

भगवान श्रीकृष्ण बोले: राजन् ! आश्विन के शुक्लपक्ष में जो एकादशी होती है, वह पापांकुशा के नाम से विख्यात है। वह सब पापों को हरनेवाली, स्वर्ग और मोक्ष प्रदान करनेवाली, शरीर को निरोग बनानेवाली तथा सुन्दर स्वी, धन तथा मित्र देनेवाली है। यदि अन्य कार्य के प्रसंग से भी मनुष्य इस एकमात्र एकादशी को उपास कर ले तो उसे कभी यम यातना नहीं प्राप्त होती ।

राजन् ! एकादशी के दिन उपवास और रात्रि में जागरण करने वाले मनुष्य अनायास ही दिव्य रुपधारी, चतुर्भुज, गरुड की ध्वजा से युक्त हार से सुशोभित और पीताम्बरधारी होकर भगवान विष्णु के धाम को जाते हैं। राजेन्द्र ऐसे पुरुष मातृपक्ष की दस पितृपक्ष की दस तथा पत्नी के पक्ष की भी दस पीढ़ियों का उद्धार कर देते हैं। उस दिन सम्पूर्ण मनोरथ की प्राप्ति के लिए मुझ वासुदेव का पूजन करना चाहिए जितेन्द्रिय मुनि चिरकाल तक कठोर तपस्या करके जिस फल को प्राप्त करता है, वह फल उस दिन भगवान गरुडध्वज को प्रणाम करने से ही मिल जाता है।

जो पुरुष सुवर्ण, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, जूते और छाते का दान करता है, वह कभी यमराज को नहीं देखता । नृपश्रेष्ठ दरिद्र पुरुष को भी चाहिए कि वह स्नान, जप ध्यान आदि करने के बाद यथाशक्ति होम, यज्ञ तथा दान वगैरह करके अपने प्रत्येक दिन को सफल बनाये |

जो होम, स्नान, जप, ध्यान और यज्ञ आदि पुण्यकर्म करनेवाले हैं, उन्हें भयंकर यम यातना नहीं देखनी पड़ती लोक में जो मानव दीर्घायु, धनाढ्य, कुलीन और निरोग देखे जाते हैं. वे पहले के पुण्यात्मा हैं पुण्यकर्ता पुरुष ऐसे ही देखे जाते हैं। इस विषय में अधिक कहने से क्या लाभ, मनुष्य पाप से दुर्गति में पड़ते हैं और धर्म से स्वर्ग में जाते हैं।

राजन् ! तुमने मुझसे जो कुछ पूछा था, उसके अनुसार पापांकुशा एकादशी का माहात्म्य मैंने वर्णन किया अब और क्या सुनना चाहते हो?


2021 में पापांकुशा एकादशी व्रत कब है? (Papankusha Ekadashi Vrat Date and Muhurat)

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, पापांकुशा एकादशी आश्विन शुक्ल के दौरान ग्यारहवें दिन (एकादशी) को आती है। इंग्लिश कलेंडर के अनुसार, यह अगस्त-सितंबर में पड़ता है। इस वर्ष पापांकुशा एकादशी शनिवार, 16 अक्तूबर को है।

Papankusha Ekadashi 2021 is on October 16, Saturday

सूर्योदय (Sunrise)October 16, 2021 6:28 AM
सूर्यास्त (Sunset)October 16, 2021 5:56 PM
एकादशी प्रारम्भ (Ekadashi Begins)October 15, 2021 6:02 PM
एकादशी समाप्त (Ekadashi Ends)October 16, 2021 5:37 PM
हरि वासरा समाप्त (Hari Vasara End)October 16, 2021 11:38 PM
पारण समय (Parana Time)October 17, 6:28 AM – October 17, 8:46 AM
द्वादशी समाप्त (End Moment)द्वादशी समाप्त (End Moment)

Papankusha Ekadashi festival dates between 2021 & 2025

YearDate
2021Saturday, 16th of October
2022Thursday, 6th of October
2023Wednesday, 25th of October
2024Sunday, 13th of October
2025Friday, 3rd of October
2026Thursday, 22nd of October
2027Monday, 11th of October
2028Friday, 29th of September

2021 एकादशी व्रत दिनांक सूची (ekadashi Vrat date list in 2021)

शुक्रवार, 23 अप्रैलकामदा एकादशी
शुक्रवार, 07 मईवरुथिनी एकादशी
रविवार, 23 मईमोहिनी एकादशी
रविवार, 06 जूनअपरा एकादशी
सोमवार, 21 जूननिर्जला एकादशी
सोमवार, 05 जुलाईयोगिनी एकादशी
मंगलवार, 20 जुलाईदेवशयनी एकादशी
बुधवार, 04 अगस्तकामिका एकादशी
बुधवार, 18 अगस्तश्रावण पुत्रदा एकादशी
शुक्रवार, 03 सितंबरअजा एकादशी
शुक्रवार, 17 सितंबरपरिवर्तिनी एकादशी
शनिवार, 02 अक्टूबरइन्दिरा एकादशी
शनिवार, 16 अक्टूबरपापांकुशा एकादशी
सोमवार, 01 नवंबररमा एकादशी
रविवार, 14 नवंबरदेवुत्थान एकादशी
मंगलवार, 30 नवंबरउत्पन्ना एकादशी
मंगलवार, 14 दिसंबरमोक्षदा एकादशी
गुरुवार, 30 दिसंबरसफला एकादशी

Last Updated on 20/04/2021

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