प्रातः स्मरणीय श्लोक | पूजन विधि

प्रातः काल पूजन के दौरान किन-किन मंत्रो का पाठ करना चाहिए..? गृहस्थ के पूजा करने की विधि क्या है? आदि प्रश्नों का उत्तर इस लेख में दिया गया है..

हमने इससे पूर्व के लेख हिन्दू नित्यकर्म (हिन्दू द्वारा प्रतिदिन किए जाने वाले 6 कर्म) बताये थे। उस लेख में हमने बिस्तर त्यागने से लेकर पूजन कक्ष जाने तक की विधि बताई थी। यह उसी श्रृंखला का द्वितीय लेख है। यदि पूजा के दौरान इन मंत्रो का पाठ किया जाए तो ईश्वर का सानिध्य प्राप्त होता है, दुर्भाग्य सौभाग्य में बदल जाता है।

इन मंत्रो का अवश्य पाठ करें, छोटे बच्चो को भी करवाये। इन मंत्रों को कॉपी में नोट कर लें, अथवा पूजन के दौरान मोबाइल साथ ले जाये। कुछ दिन मंत्र स्वतः याद हो जाएगा। यदि कोई मंत्रो का जप करने में असमर्थ है, तो देवता का नाम लेकर स्मरण भी कर सकते है।

प्रातः स्मरणीय श्लोक | Hindu Dharma (Sanatan Dharma)

गणेश स्मरण मंत्र

प्रातः स्मरामि गणनाथमनाथबन्धुं
सिन्दूरपूर परिशोभित गण्डयुग्मम् ।
उद्दण्डविघ्न परिखण्डन चण्डदण्ड
लादिसुरनायक वृन्दवन्द्यम् ।।

अर्थ:- मैं इस मंगलमय प्रातःकाल में, अनाथों के बंधु, सिन्दूर में परिपूरित गालों से शोभित, अनिष्टकारी कठोर विघ्नों का विनाश करने वाले, देवताओं के एकमात्र नेता, ऋषि-मुनियों के समूह से पूजित भगवान श्रीगणेश का प्रातःकालीन स्मरण करता हूँ।

शिव स्मरण मंत्र

प्रातः स्मरामि भवभीतिहरं सुरेशं
गंगाधरं वृषभवाहन मम्बिकेशम्।
खट्वाइंगशूलवरदाभय हस्त मी शं
संसार रोगहर मौषधमद्वितीयम् ।।

अर्थ:- संसार के भय को नष्ट करने वाले, देवेश, गंगाधर, वृषभवाहन, पार्वतीपति, हाथ में खट्वांग एवं त्रिशूल लिये और संसाररूपी रोग का नाश करने के लिए अद्वितीय, औषथि-स्वरूप, अभय एवं वरद मुंडायुक्त हस्तवाले भगवान शिव का मैं प्रातःकालीन स्मरण करता हूँ।

देवी स्मरण मंत्र

प्रातः स्मरामिशरदिन्दुकरोज्ज्वलाभां
सद्रत्नवन्मकरकुण्डलहारं भूषाम् ।

अर्थ:- शरदकालीन चन्द्रमा के समान उज्ज्वल आभावाली, उत्तम रत्नों से जटित मकरकुण्डलों तथा हारों से सुशोभित, दिव्यायुषों में लीप्त सुन्दर मीले हजारों हाथोंवाली, लाल कमल की आभायुक्त चरणों वाली भगवती दुर्गा देवी का मैं प्रातःकालीन स्मरण करता हूँ।

विष्णु स्मरण मंत्र

प्रातः स्मरामि भवभीतिमहार्तिनाशं
नारायणं गरुइवाहनमब्जनाभम् ।
ग्राहाभिभूतवरवारण मुक्तिहेतुं
चक्रकायुधं तरुणवारिज पत्रनेत्रम्।।
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अर्थ:– संसार के भयरूपी महान दुख को नष्ट करने वाले, ग्राह में गजराज को मुक्त करने वाले, चक्रधारी एवं नवीन कमलदल के समान नेत्रवाले, पद्मनाभ गरूड़वाहन भगवान श्रीनारायण का मैं प्रातःकालीन स्मरण करता हूँ।

सूर्य स्मरण मंत्र

प्रातः स्मरामि खलुतत्सवितुर्वरेण्यं
रूपं हि मण्डल मृचोऽथ तनुर्यजुंषि।
सामानि यस्य किरणाः प्रभवादिहेतुं
ब्रह्माहरात्मक-मलक्ष्य-मचिन्त्यरूपम् ।।

अर्थ:- सूर्य का वह प्रशस्त रूप जिसका मण्डल ऋग्वेद, कलेवर यजुर्वेद तथा किरणें सामवेद हैं। जो सृष्टि के आदि कारण है, ब्रह्मा और शिव के स्वरूप हैं तथा जिनका रूप अचिन्त्य और अलक्ष्य है, प्रातःकाल में मैं, ऐसे सूर्यदेव का स्मरण करता हूँ।

नवग्रह स्मरण मंत्र

ब्रह्मा मुरारिस्त्रि-पुरान्तकारी भानुः शशि भूमिसुतो बुधश्च।
गुरुश्च शुक्र: शनि राहु केतवः कुर्वन्तु सर्वे मम् सुप्रभातम्।।

अर्थ:- ब्रह्मा विष्णु और शंकर इन तीनों महादेवों का स्मरण करते हुए सूर्य, चन्द्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु और केतु इन सभी ग्रहों को मैं प्रातःकालीन नमस्कार करता हूँ। ये सभी ग्रह मेरे लिए मंगलकारी हो जाएं, जिससे मेरे आज के दिन का प्रारंभ मंगलमय हो।

इतना कर लेने के पश्चात आप अपनी श्रद्धा अनुसार अन्य देवी-देवता की उपासना कर सकते है। इतना करे, तो भी प्रयाप्त है।

।। ॐ नमः शिवाय।।


हमने पाठकों को कोई परेशानी न हो इसलिए श्लोक को हिंदी और इंग्लिश दोनो भाषाओं में उपलब्ध करवाया है। कृपया प्रातः पूजन में अवश्य प्रयोग करें। अपने परिवार जनो को भी बताए। धन्यवाद..🙏


Tags- Pratah Smran Shlok Lyrics, Pratah Vandana

Last Updated on 12/03/2021