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अंक गणित

Short Introduction:- अंक गणित (Arithmetic) गणित की तीन बड़ी शाखाओं में से एक है। अंकों तथा संख्याओं की गणनाओं से सम्बंधित गणित की शाखा को अंकगणित कहा जाता हैं। प्रत्येक मनुष्य अपने दैनिक जीवन में प्रायः अंकगणित का उपयोग करता है। अंकगणित के अन्तर्गत जोड़, घटाना, गुणा, भाग, दशमलव आदि प्रक्रियाएँ आती हैं।

Arithmetic

अंक गणित क्या है? (what is Arithmetic)


अंक गणित को इंग्लिश में Arithmetic कहते है। Arithmetic शब्द की उत्पत्ति ग्रीक शब्द के Arithmos शब्द से हुई है, जिसका अर्थ संख्या होता है। यह गणित की मौलिक शाखा है तथा इसी से गणित की प्रारम्भिक शिक्षा का आरम्भ होता है। प्रत्येक मनुष्य अपने दैनिक जीवन में प्रायः अंकगणित का उपयोग करता है।

अंक गणित का इतिहास (History of Arithmetic in hindi)


अंको के इतिहास के विषय में बहुत कम जानकारियाँ उपलब्ध हैं। लेकिन प्राचीन समय से ही विश्वभर में गणना के लिए विभिन्न तरीकों को प्रयोग किया जाता था। जब लिखने का कोई साधन नही था तब मनुष्य उंगली पर ही गिना करते थे। बाद में उसने लकड़ी पर निशान लगाकर गिनना प्रारम्भ किया।

counting with hand

मनुष्य प्रारम्भिक काल में कबीला बना कर रहा करता था। तब सदस्यों की गिनती के लिए भी अंकों की आवशयकता पड़ती थी। कहा जाता है कि ईसा पूर्व 1850 में बेबीलोन के निवासी गणित की प्रारम्भिक प्रक्रियाओं से अच्छी तरह से परिचित हो गए थे।

यूनानी लोग व्रणमाला के अक्षरों को गिनती के लिए प्रयोग में लाते थे, तो रोम में रोमन नंबर का प्रयोग किया जाता था। रोमन नंबर आज भी विभिन्न स्थानो में प्रयोग में लाती जाती है भारत में भी कक्षा सूचनांक के रूप में रोमन नंबर का ही प्रयोग किया जाता है।  

भारत में अंक गणित (Arithmetic in India)


भारत  में अंकगणित का ज्ञान अत्यन्त प्राचीनकाल से रहा है तथा वेदों में भी गणितीय प्रक्रियाओं का उल्लेख है। विश्व भर में आज जो अंक पद्धति प्रयोग में लाये जाते है, वह भारतीय अंक पद्धति है। जो भारत से होता हुआ अरब देश पहुंचा और वहाँ से विश्व भर में प्रचलित हो गया।

सर्विदित है की शून्य की खोज भारत ने की जो अरब में जाकर “सिफर” हो गया ओर इंग्लिश में “ज़ीरो“। भारतीय अंक और इंग्लिश गिनती की संरचना में तो काफी समानता भी देखने को मिलती है।  

अंक और संख्या ( Digits & Numbers)


शून्य से लेकर नौ को प्रदर्शित करने वाले संकेतों को अंक कहते हैं। अंक ही गणित का मूल है। दैनिक जीवन के अधिकांश कार्यों में अंकों का प्रयोग होता है। संख्या एक से अधिक अंकों को एक के पास एक रखने से संख्या बनती है। अंक केवल दस होते हैं किन्तु संख्याएँ अनन्त हैं।

अंकगणित की मूल प्रक्रियाएँ (Arithmetic operations)


अंकगणित की चार मूल प्रक्रियाएँ होती हैं-

  • जोड़
  • घटाना
  • गुणा
  • भाग

जोड़ (Addition)

जब किसी संख्या या अंक में एक या एक से अधिक संख्या या अंक को मिलाया जाता है तो उसे जोड़ ( कहते हैं। जोड़ को + चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है।

उदाहरणः
2 + 5 = 7
5+5 =10

घटा (Subtraction)

जोड़ने की प्रक्रिया के विरुद्ध प्रक्रिया को “घटाना” कहा जाता है। जब किसी संख्या अथवा अंक से किसी दूसरी संख्या या अंक को कम किया जाता है तो उसे घटाना कहा जाता है। घटाने को  चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है।

उदाहरणः
6-4 =2
5-2 =3

गुणा (Multiplication)

जब किसी संख्या अथवा अंक में उसी संख्या अथवा अंक को एक या एक से अधिक बार जोड़ा जाता है तो उसे गुणा कहते हैं। संख्या अथवा अंक को जितनी बार जोड़ा जाता है वह उतनी ही बार गुणा होता है। गुणा को x चिह्न से प्रदर्शित किया जाता है।

उदाहरणः
2 x 5 = 10
5×2 =10

भाग (Division)

गुणा करने की प्रक्रिया के विरुद्ध प्रक्रिया को भाग (Division) कहते है। जब किसी संख्या अथवा अंक में किसी संख्या अथवा अंक को एक से अधिक बार घटाया जाता है तो उसे भाग कहते हैं। संख्या अथवा अंक को जितनी बार विभाजित किया जाता है, उतनी ही बार भाग देना होता है। भाग को / चिह्न द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।

उदाहरणः
6/3 =2
9/3 =3

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