सूर्य रेखा (Sun Line) | हस्तरेखा

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सूर्य रेखा (Sun Line Palmistry Hindi)

भाग्य रेखा को तेजोमय बनाने का सौभाग्य सूर्य रेखा को प्राप्त है। सूर्य रेखा का प्रभाव यह है कि वह भाग्य रेखा के गुणों को चमका देती है । जिस प्राणी के हाथ में भाग्य रेखा के साथ के साथ उत्तम सूर्य रेखा भी हो तो उसका फल यह होता है कि ऐसे प्राणी का भाग्य खूब चमकता है। सूर्य उसकी यश और कीर्ती में चार चांद लगा देता है ।

भाग्य रेखा के साथ बलवान सूर्य रेखा बहुत कम प्राणियों के हाथ में देखी जाती है और जिस प्रणी के हाथ में होती हैं वह दिन दूनी रात चौगुनी उन्नति करता है। अभिनेता, नेता, बड़े व्यापरियों आदि के हाथ में यह दोनों रेखायें प्रखर रूप से दिखाई देती हैं।

यह आवश्यक नहीं कि सूर्य रेखा हर प्राणी के हाथ में अवश्य हो। अनुभव में यह रेखा लगभग 30% हाथ में देखने को मिलती है। अब हम सूर्य रेखा का विभिन्न उद्गम स्थान बातते है-

जीवन रेखा से प्रारंभ होने वाली सूर्य रेखा (Sun Lins Starting Form the Life Line)

कुछ प्राणियों के हाथ में सूर्य रेखा जीवन रेखा से प्रारम्भ होती है। ऐसी रेखा भविष्य में प्राणी को उन्नति पथ पर ले जाती है और उसकी कार्ति को बढ़ाती है। ऐसे प्राणी कला के पुजारी होती है। प्राकृतिक सौन्दर्य में उनकी विशेष रूचि होती है। वह अपने ही परिश्रम और साधना से सफल कलाकार होते हैं। किसी भी बात को केवल इशारे मात्र से ही समझ लेने का गुण उनमें विद्यमान होता है।

भाग्य रेखा से प्रारंभ होने वाली सूर्य रेखा (Sun Line Starting From the Fate Line)

कुछ लोगों के हाथ में सूर्य रेखा भाग्य रेखा से ही प्रारम्भ होती है। ऐसे आदमी अपने जीवन में उत्तरोत्तर उन्नति करते हैं। इसका प्रमुख कारण यह है कि भाग्य रेखा में ही सूर्य रेखा का जन्म होने कारण सूर्य रेखा भाग्य रेखा के अवगुणों को दबा देती है और उसके गुणों को प्रकाश में लाकर प्राणियों को उन्नति पथ पर चलने की शक्ति प्रदान करती है। भाग्य रेखा के साथ यदि सूर्य रेखा के गुण भी मिल जाते हैं तो सोने में सुहागे का काम होता है। स्वच्छ, स्पष्ट और गहरी सूर्य रेखा अमर कीर्ति का फल देने वाली होती है ।

मस्तिष्क रेखा से प्रारम्भ होने वाली सूर्य रेखा (Sun Line Starting From the Mind Line)

कुछ प्राणियों के हाथ में सूर्य रेखा मस्तक रेखा से प्रारम्भ होती है । इसका फल यह होता है कि प्राणी की मस्तिष्क शक्ति प्रखर होनी चाहिये। वह अपनी दिमागी शक्ति से ऐसे कार्य करता है जो बुद्धिमानं पुरुष भी सोच नही पाते।

अक्सर ऐसे लोग भी देखे गये हैं जो शिक्षा के नाम पर एक अक्षर भी नहीं जानते मगर वह बहुत ही कुशल इन्जीनियर, व्यापार, आदि क्षेत्रों में महत्वपूर्ण स्थान पाता है और अपने विचारों को अपने सहयोगियों के सम्मुख प्रगट करने की क्षमता रखता है। वह प्रतिभा शाली व्याख्यान दाता होता है और उसको यश प्राप्त होता है।

  • यदि प्राणी की भाग्य रेखा से निकली हुई शाखा बृहस्पति अर्थात् गुरू पर्वत के क्षेत्र में जाकर विलीन हो जाती है तो ऐसा प्राणी नौकरी में उन्नति करता. है वह अच्छी पदवी पाता है। उसके अधिकारी उसके कार्य से प्रसन्न रहते हैं और उसके कथन को मान देते हैं। उसमें शासन की योग्यता होती है। उसकी सलाह लाभकारी होती है और इन्ही कारणों से वह दिनों दिन उन्नति करता चल जाता है। उसका प्रभाव यह भी हो सकता है कि है कि वह कुशल व्यापारी, सम्पादक या लेखक होकर सफलता को प्राप्त करे।
  • यदि भाग्य रेखा जीवन रेखा के आस पास से ही प्रारम्भ हो और आगे चलकर जीवन रेखा को स्पर्श करती हुई आगे बढ़े तो यह निश्चय है कि ऐसे प्राणी के जीवन पर किसी स्त्री का हाथ रहेगा। वह प्राणी यदि पुरुष है तो स्त्री की सलाहों पर चलने बाला होगा। यदि अविवाहित है तो उन्नति के मार्ग में उसकी प्रेमिका यादव दोगी। वह प्रेमिका के प्रेम में इतना डूब जायेगा कि काम आसक्त होकर वह अपनी उन्नति को स्वयम्’ ही रोक देगा। उसके जीवन का अधिक प्रभाव उसकी उन्नति पर पड़ेगा ।
  • वैसे भाग्य रेखा का टूटा होना अशुभ है मगर टूटते समय यदि भाग्य रेखा गहरी है और फिर जब वह पुनः प्रारम्भ होती हो तेरा भी गहरी और स्पष्ट हो तो वह यह स्पष्ट करती है कि प्राणी के उन्नति मार्ग पर यकायक कोई बाधा उत्पन्न हो जायेगी और पुनः

मणिबंध से प्रारम्भ होने वाली सूर्य रेखा (Starting From The Bracelet Line)

कुछ प्राणियों के हाथ में सूर्य रेखा मणिबन्ध रेखा या उनके पास ही से प्रारम्भ होती. है और ऊपर की ओर चल जी है। एसी दशा में यह जानना आवश्यक है कि सूर्य रेखा भाग्य रेखा के समीप ही सामान्तर दशा में अग्रसर हो रही है। यदि सूर्य रेखा भाग्य रेखा के समीप ही है और सामान्तर दिशा ही में अप्रसर हो रही है तो वह बहुत सुन्दर लक्षख है.

ऐसी रेखावाली प्राणी जिस कार्य में भी हाथ डालता है वह उसमें ही सफलता पाता है। उसके सहयोगी उससे प्रेम करते हैं, अधिकारी उसकी प्रशंसा करते हैं, समाज में उसका मान होता है।

चन्द्र पर्वत से प्रारम्भ होने वाली सूर्य रेखा (Starting from the Mount of Moon)

कुछ प्राणियों के हाथ में सूर्य रेखा चन्द्र ग्रह के स्थान से प्रारम्भ होती है और अनामिका की ओर अग्रसर होती है । सूर्य और चन्द्र में पुराना बैर है। इस पर चन्द्र देव की प्रकृति तो सदा ही चर्चा है। इस कारण चन्द्रमा के प्रभाव के कारण इस प्रकार की रेखा वाले प्राणी की उन्नति में सदेह होता है।

ऐसे प्राणी यद्यपि उन्नति करके नाम और धन कमाना चाहते हैं मगर वह अपने विचारों की चर्चलता के कारण स्थिर नहीं रह पाते हैं । यह प्रयत्न भी करते हैं मगर क्योंकि उनके संकल्प कमजोर होते हैं. उन्हें सफलता प्राप्त नहीं हो पाती है।

जीवन रेखा से प्रारम्भ होने वाली सूर्य रेखा (Starting From the line of Life)

जब सूर्य रेखा जीवन रेखा से प्रारम्भ होती है तो उसको अभिप्राय है कि प्राणी के जीवन से ही सम्बन्धित किसी आधार को पाकर ही प्राणी उन्नति कर सकता है। ऐसी दशा में सम्भव है कि किसी निर्धन का धनवान से विवाह हो जाये। उसका कोई धनवान सम्बन्धी मरते समय उसे धन दे जाये आदि। इस प्रकार धन प्राप्त कर लेने के बाद ही वह उन्नति के पंथ पर चल सकता है यही इस रेखा का गुण है।


सूर्य रेखा से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

सीधी, सुंदर, स्पष्ट, गहरी और स्वच्छ सूर्य रेखा यदि. “भाग्य रेखा के सामान्तर ही मणिबन्ध रेखा से प्रारम्भ होकर चले तो वह सर्वोत्तम होती है.” जिस प्राणी के हाथ में यह रेखा पायी जाती है उसे सकल सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं और वह यश को प्राप्त होता है। इसके विपरीत, हल्को, अस्पष्ट, अस्वच्छ सूर्य रेखा कीर्ती के स्थान पर अपकीर्ती तो नही लाती परन्तु प्राणी की उन्नति में बाधक अवश्य होती हैं।

अक्सर देखा गया है कि सूर्य रेखा के साथ ही साथ अन्य छूट-पुट रेखायें उसके साथ-2 जाकर अन्त में विलीन हो जाती है। एसी रेखा का सूर्य रेखा पर प्रभाव पड़ता है । जिस ग्रह के क्षेत्र से वह रेखायें प्रारम्भ होतो हैं वही प्रभाव वह सूर्या रेसा पर डालती है और उसका असर यह होता है कि वह ग्रह देव उसकी उन्नति में सहायक होते हैं।

मगर यदि उनमें से कुछ रेखायें सूर्य रेखा को स्थान-2 पर काटने लगे तो उसका असर हो जाता है प्राणी की उन्नति उन रेवाओं को प्रारम्भ होने वाले ग्रहों के प्रभाव से रुक जाती हैं। उन्नति में विभिन्न वाधायें उत्पन्न होने लगती हैं। एसी अवस्था में एसी रेखा वाले प्राणी को उचित हैं कि वह अपना संयम् स्थिर रखे और सच्ची लगन के साथ अपने कार्य में रत हो जाये । सफलता उसके चरणों में होगी।

यह भी देखा गया है कि सूर्य रेखा समाप्ति के स्थान पर चाकर सर्प जिह्वाकार हो जाती है। एसी रेखा का फल यह होता है कि प्राणी का हृदय चञ्चल हो जाता है। वह अपने प्रयासों को सफलता पूर्वक संचालित नहीं कर पाता। उसके सामने लोभ प्रलोभन आ जाते हैं और उसकी एकाग्र साधना कई भागों में विभाजित हो जाती है और इसका फल यह होता है कि लगन के विभाजन होने के कारण वह अपनी उन्नति पथ पर पूर्वा निश्रय के साथ अग्रसर नहीं हो पाता और परिणाम स्वरूप अपकीति’ नहीं तो कीर्ती भी नहीं पाता।

यदि सूर्य रेखा स्वच्छ, स्पष्ट और गहरी है और उसके साथ ही चंद्र ग्रह क्षेत्र तथा’ शुक्र क्षेत्र उभरा हुआ है तो ऐसा प्राणी साहित्य में विशेष रूचि रखता है और साहित्यिकत्तेत्र में अपनी कीर्ति को बढ़ाता है उसकी गिनती साहित्य कारों तथा आलोचकों में की जाती है ।

सूर्य रेखा से विभिन्न शाखा का निकलना (Branches From Sun Line)

जब सूर्य रेखा में से विभिन्न शाखायें निकलती हों और वह अन्य ग्रह देवता के क्षेत्र में जाकर विलीन होती हैं तो उसका फल अन्य ग्रह देवता के प्रभाव से बदल जाता है ।

जब सूर्य रेखा की शाखा सूर्य के क्षेत्र में जाकर विलीन होती हैं तो उसका फल होता है कि ऐसा प्राणी यश और कीर्ती पाता हैं। वह राजनैतिक नेता, धर्मोपदेशक, व्याख्यानदाता आदि होकर सार्वजनिक कार्यों में रूचि लेने वाला होता है सार्वजनिक जीवन ही में उसे सफलता प्राप्त होती है।

सूर्य रेखा से गुरु की और जाती रेखा

जब सूर्य रेखा से निकलने वाली शाखा गुरू के क्षेत्र में जाकर विलीन होती है तो उसका फल यह होता है कि ऐसी रेखा वाला प्राणी शासक वर्ग में स्थान पाता है और वह अपने अधिकारों को उचित प्रयोग करके अपने रासित जनों का कृपा पात्र और प्रेम पात्र बनकर सम्मान और यश को पता है उसकी प्रजा उसे प्रेम करती है और वह शासन के कार्यों में उच्च अधिकार’ पाकर उन्नति करता है।

सूर्य रेखा से बुध की और जाती रेखा

जब सूर्य रेखा से प्रारम्भ होने वाली शाखा बुध देव के क्षेत्र में जाकर विलीन हो जाती है तो ऐसे प्राणी. की उन्नति कलात्मक कार्यों में ही हो पाती है। वह अच्छा कलाकार, चित्र कार, लेखक, संगीतज्ञ, नाट्यकार, अभिनेता आदि होकर अपने कार्य में दक्षता प्राप्त करता है । लोग उसकी कला से प्रभावित होते हैं और वह अपनी कला के कारण यश और कीर्ती पाता है।

सूर्य रेखा से शनि की और जाति रेखा

जय सूर्य रेखा से प्रारम्भ होने वाली शाखा शनि देव के क्षेत्र में जाकर विलीन होती है तय भाग्य उन्नति के शिखर पर पहुँच जाता है मगर शर्त यह है कि ऐसी रेखा के साथ ही साथ प्राणी के हाथ में उच्च भाग्य रेखा भी पड़ी हो। शनि देव सूर्य का पुत्र है अतः पिता और पुत्र दोनों सहयोग देकर प्राणी को सुखी, और समृद्धिशाली बनाने में पूर्ण सहायता देते हैं तथा उसकी कीर्ती और यश को फैलाते हैं।

यदि इस रेखा के साथ २ अन्य बहुत सी चुट पुट रेखाये हथेली के मध्य भाग से प्रारम्भ होकर सूर्य के क्षेत्र में जाकर विलीन हो जाती हैं तो उनका प्रभाव भी अच्छा ही होता है । यह तमाम सूर्य रेखा की सहायता ही.करती हैं । और प्राणी की उन्नति तथा कीर्ति में सहायक ही होती हैं। इन सयको सूर्य रेखा का सहायक ही माना जाता


सूर्य रेखा का टूटना (Bracked sun Line)

यदि सूर्य रेखा किसी स्थान पर टूट जाती है तो व स्थान प्राणी के अपयश और अप कीर्ति का द्योतक होता है। सूर्य रेखा का टूटा होना श्रेयकर नहीं होता । इसके टूटने से उन्नति रूक जाती है, बदनामी होती और प्राणी की उन्नति की दिशा बदल जाती है और वह अवनति के पथ पर चलने लगता है । इन तमाम कारणों से सूर्य रेखा का टूट जाना अच्छा लक्षण नहीं समझा जाता है।

सूर्य रेखा पर द्वीप का चिन्ह (Island On the Line of sun)

यदि किसी प्राणी के हाथ सूर्य रेखा के ऊपर ही द्वीप का चिन्ह पड़ा है तो उसका फल विशेष नहीं समझा जाता। द्वीप का होना वैसे तो बुरा लक्षण है मगर उसका असर सूर्य रेखा पर विशेष नहीं पड़ता। जो भी असर सूर्य रेखा पर पड़ता है। वह न के बराबर होता है। द्वीप युक्त रेखा की तुलना में दूटी हुई सूर्य रेखा अधिक बुरी होती है।

सूर्य रेखा में वर्ग का चिन्ह (Square on The Sun line)

यदि सूर्य रेखा के ऊपर वर्ग का चिन्ह पाया जाय तो वह बहुत शुभ माना जाता है वर्ग का चिन्ह सूर्य रेखाके तमाम अशुभ लक्षणों के प्रभाव को समाप्त कर देता है और अपने लक्षणों के प्रभाव से प्राणीके जीवन में नवीन शक्ति, उत्साह और कर्मराययता को जन्म देकर उसे उन्नति के पथ पर चलने की प्रेरण देता है। और उसकी यश कीर्ति को बढ़ाने में सहावता देता है ।

यदि दस्तकार के हाथ में सूर्य रेखा हो तो उसका प्रभाव होता है कि उसकी कीर्ति उसके जीवन काल में नहीं फैलेगी। औरत कार के हाथ की सूर्य रेखा का प्रभाव होता है कि उसकी कीर्ति तो उसकी मृत्यु के बाद ही फैलाती है। वैसे दस्तकार व्यापारी के हाथ में सूर्य रेखा पायी ही नहीं जाती। इसी कारण इन लोगों को जीवन यापन के लिये कठिन परिश्रम और निरंतर साधना करनी पड़ती है। कभी- 2 उच्च कोटि के दस्तकार को अपने जीवन निर्वाह के लिये धन जुटाने में अथक परिश्रम भं करना पतड़ा है.। मगर सूर्य रेखा वाले प्राणी प्रतिष्ठा और गौरव अवश्य प्राप्त करते हैं और वह उनको जीवन के अन्तिम दिनों में या मरने के पश्चात् ही प्राप्त होता. है।

सूर्य रेखा पर तारे तारा का चिन्ह (Star on The Sun Line)

वैसे. तो नक्षत्र अर्थान् तारा अन्य स्थान में अच्छा लक्षण नहीं माना जाता परन्तु सूर्य रेखा पर यदि नक्षत्र का चिन्ह पड़ा हो तो वह सौभाग्य में वृद्धि करके यश और कीर्ति के वढ़ाने वाला होता है । इस को सूर्य रेखा पर बहुत ही शुभ लक्षण माना जाता है।

हृदय रेखा से प्रारम्भ होने वाली रेखा यह प्रमाणित करती है कि ऐसी रेखा वाला.प्राणी अपने स्वच्छ और सरल हृदयता के कारण अपने साथियों और सहयोगियों की श्रद्धा और. आदर का पात्र होता है और वह प्रकृति ही से सरल हृदय, उदार, कर्मठ, निष्कपट, प्रिय. होता है । उसके साथी उसका सम्मान करते हैं और उसको प्रेम करते हैं । उसकी उन्नति उसके गुणों के कारण ही होती है।

सामुद्रिक शास्त्र (ज्योतिषाचार्य भृगुराज)