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भारत का प्रथम स्वतन्त्रता संग्राम 1857

Indian rebellion of 1857 नमस्कार मित्रों! यह हमारे वैबसाइट का प्रथम लेख है। तो हमने सोचा क्यों न प्रथम लेख भारत के स्वतंत्रता के दिशा में पहले कदम यानि प्रथम स्वतंत्रता संग्राम 1857 “ के ऊपर लिखा जाये-

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भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (Indian rebellion of 1857)

भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम उत्तर प्रदेश राज्य के मेरठ शहर से प्रारम्भ हुआ था। यह भारत की राजधानी दिल्ली से 70 किलो मीटर दूर है। यह विद्रोह भारतीय सैनिकों की एक टुकड़ी ने किया था। क्या था पूरा मामला चलिए विस्तार से जानते है-


प्रथम विद्रोह क्यों हुआ? (Why first rebellion happen?)

यह बात तब की है जब अंगेजी सेना में भारतीय भी शामिल हुआ करते थे। सन 1857 में अँग्रेजी प्रशासन ने अपने सैनिको को Upgrade करने के लिए नई इंफील्ड राइफल (The Enfield rifle) दी। उस बंदूक के कारतूसों पर चिकनाई युक्त कागज लगा रहता था और इस कागज के किनारों को दांतों से काटकर कारतूसों में भरना होता था।

जब भारतीय सैनिको को इस बात पता चला, कि उस कागज में गौ-मांस और सूअर की चर्बी मिली रहती है। तो हिन्दू-मुसलमान दोनों का गुस्सा फुट पड़ा। उन्हे लगा अंग्रेजी सरकार ने जानकर उनका धर्म भ्रष्ट करने के लिए उन्हे इस प्रकार की राइफल दी है।

दरअसल हिन्दू धर्म में गाय को पवित्र माना जाता है, और पूजा की जाती है। वही मुस्लिम धर्म में सुवर का नाम लेना भी शुभ नही माना जाता। नई राइफल मे दोनों की ही चर्बी का इस्तमल किया गया था, जिस कारण हिन्दू-मुस्लिम सैनिकों ने विद्रोह छेड़ दिया।


मंगल पांडे को फांसी (Mangal Pandey hanged)

29 मार्च 1857 को एक ब्रिटिश ऑफिसर की ह्त्या करने के आरोप में मगल पांडे को फांसी दे दी गयी। इसके अलावा जब एक रेजीमेंट के 99 सैनिको ने चिकनाई मिले कारतूसों का प्रयोग करने से मना कर दिया। तो उन्हे 9 मई को सैनिक पद से बर्खास्त कर 10 साल कैद की सजा सुना दी गयी। मगर मेरठ के अन्य सैनिकों ने मिलकर उन सैनिकों को अंग्रेज़ो की कैद से छुड़ा लिया। इस प्रकार मेरठ और अँग्रेजी सैनिको के मध्य जंग का आगाज हो गया।

10 मई को मेरठ से सैनिको का दस्ता दिल्ली की ओर कूच कर गया। यह अंगेजी सेना के खिलाफ पहला विद्रोह था। इससे पहले ऐसा कभी नहीं हुआ था। सैनिको के दल के पीछे आम जन-मानस भी जुड़ता चला गया और देखते ही देखते कारवा बनता चला गया।

सैनिको के एक दस्ते ने दिल्ली के बादशाह जफर के पास पहुँच उन्हें नेत्ररत्व स्वीकर करने के लिए राजी कर लिया। ओर इस प्रकार दिल्ली विद्रोह का केंद्र ओर बहादुरशाह जफर विद्रोह के प्रतीक बन गए। दिल्ली के बाद कानपुर, लखनऊ, बनारस, इलाहबाद, बरेली, झाँसी आदि शहरो पर भी विद्रोह की ज्वाला प्रज्वलित हो उठी।

कानपुर का नेतृत्व नाना साहब, लखनऊ का बेगम हजरत महल, झाँसी रानी लक्ष्मी बाई और बरेली का खान बहादुर ने किया। यूपी के बाद क्रांति की लहर बिहार की ओर भी कूच कर गयी बिहार का नेत्रत्व कूवर सिंह ने किया। इसके बाद राजस्थान ओर महाराष्ट के छोटे मोटे शहरों में भी विद्रोह प्रारम्भ हो गया था।


प्रथम विद्रोह असफल क्यों हुआ? (Reasons of its failure)

अँग्रेजी सेना के खिलाफ विद्रोह लगभग 1 वर्ष चला। अँग्रेजी सैनिको के पास आधुनिक हथियार ओर भारी सैनिक होने के कारण विद्रोही उनका ज्यादा देर तक सामना नही कर पाये और वीरगति को प्राप्त हो गए। मंगल पांडे को फांसी चढ़ा दिया गया, बहादुरशाह जफर को कैद कर लिया गया। लक्ष्मी बाई लड़ाई करते हुये शहीद हो गयी।


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